सोनिया गांधी कांग्रेस संसदीय दल की नेता बनीं
असम से कांग्रेस के युवा सांसद तरुण गोगोई ने कहा कि सोनिया गांधी के फिर से कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना जाना हमारे लिए एक भावुक पल था. वहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा की यह बड़ी बात है की हमारी नेता सोनिया गांधी फिर से संसदीय बोर्ड की अध्यक्ष बनीं हैं. खरगे ने कहा कि इससे बेहतर क्या हो सकता है, जो इंसान पार्टी के लिए अपनी सारी खुशियां छोड़कर पार्टी की सेवा कर रही हैं, मैं उनको सैल्यूट करता हूं. उन्होंने अपनी तकलीफ को पीछे रख कर देश के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी.
संसदीय दल का नेता चुने जाने पर सोनिया गांधी का बयान
कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद सोनिया गांधी न कहा कि आप सभी ने एक बार फिर मुझे फिर बड़ी जिम्मेदारी दी है, उसके प्रति मैं गहराई से सचेत हूं. सबसे पहले मैं सभी नवनिर्वाचित लोकसभा सांसदों का अभिनंदन करती हूं. आपने सबसे चुनौती पूर्ण परिस्थितियों में कठिन चुनाव लड़ा है. आपने कई बाधाओं को पार किया है और बहुत प्रभावी ढंग से अभियान चलाया है. आपकी सफलता ने हमें लोकसभा में अधिक उपस्थिति और इसकी कार्यवाही में अधिक प्रभावी आवाज प्रदान की है, ये दोनों हमारी भागीदारी को अधिक ताकत देने में मदद करेंगे. सोनिया ने कहा कि कई लोगों ने तो कह दिया था कि हम खत्म हो जाएंगे. लेकिन खड़गे जी के दृढ़ नेतृत्व में हम टिके रहे. वह हम सभी के लिए प्रेरणा हैं. उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा वास्तव में ऐतिहासिक आंदोलन थे जिन्होंने हमारी पार्टी को फिर से जिंदा किया. अभूतपूर्व व्यक्तिगत और राजनीतिक हमलों के बावजूद लड़ने की अपनी दृढ़ता और दृढ़ संकल्प के लिए राहुल विशेष धन्यवाद के पात्र हैं.
राहुल गांधी बनेंगे नेता प्रतिपक्ष ?
सोनिया गांधी के संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद कांग्रेस के साथ ही NDA में इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गई की कांग्रेस या इंडिया गठबंधन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष किसे बनाएगा. कांग्रेस कार्य समिति और पार्टी संसदीय दल की बैठक में राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव पास हुआ है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्यों ने प्रस्ताव पारित किया कि राहुल गांधी को लोकसभा में पार्टी का नेता नियुक्त किया जाना चाहिए. हालांकि, इस प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने कहा कि वो विचार करेंगे.
बता दें की 2019 लोकसभा में कांग्रेस के पास इतनी भी सीटें नहीं थी की उसे लोकसभा में नेता विपक्ष का दर्जा मिले. बाद में बंगाल से चुनकर आए अधीर रंजन चौधरी को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था. अब अगर राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बनते हैं तो भारत की संसदीय राजनीति में ये पहला मौका होगा जब नेहरू गांधी परिवार से दो सदस्य एक साथ दो बड़े पदों पर आसीन नजर आएंगे. यानी सोनिया गांधी कांग्रेस संसदीय दल की नेता और राहुल गांधी लोकसभा में नेता विपक्ष.
क्यों है सस्पेंस
राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने में कोई अड़चन तो नहीं है लेकिन बाहर संदेश परिवारवाद का जाएगा। अब जब कांग्रेस को परिवारवाद के साये से निकालने के लिए मल्लिकार्जुन खरगे को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया तो दोनों महत्वपूर्ण पद सोनिया और राहुल के पास ही रहने से कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाएगा। उल्लेखनीय है। कुछ ही महीने बाद कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच फिलहाल कांग्रेस पर परिवार का शासन का संदेश नहीं देना चाहती।