विश्व विकलांग दिवस : विकलांगता का विषय व्यापक और गंभीर है। यह गर्भावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक चिंतन और देखभाल की माँग करता है। बेउर स्थित इंडियन इंस्टिच्युट ऑफ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च में विश्व विकलांग दिवस के पाँच दिवसीय समारोह का उद्घाटन करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्मभूषण डा सी पी ठाकुर ने विकलांगता की रोकथाम और पुनर्वास पर जोर दिया।
गर्भावस्था में सावधानी से रोकी जा सकती है विकलांगता
डा ठाकुर ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान ग़लत दवाइयों का सेवन, एक्स-रे का रेडिएशन और नशे की लत शिशु में जन्मजात विकलांगता के कारण हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जन्म के बाद कुपोषण और गंभीर बीमारियाँ विकलांगता का कारण बन सकती हैं। उन्होंने बच्चों को उत्साहित करने और अपशब्द कहने से बचने की सलाह दी।
समाज में बौद्धिक विकलांगता से बचने की आवश्यकता: न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद
समारोह के मुख्य अतिथि और पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि विकलांगता का चिंतन केवल विकलांगों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे समाज के हर व्यक्ति के लिए आत्मचिंतन का विषय बनाना चाहिए। उन्होंने विकलांगों के प्रति घृणा और हीन भावना को बौद्धिक विकलांगता बताया और इसे सबसे हानिकारक विकलांगता करार दिया।
बिहार में दिव्यांग पुनर्वास के लिए अलग विभाग की माँग
संस्थान के निदेशक और साहित्यकार डा अनिल सुलभ ने बिहार में दिव्यांग पुनर्वास के लिए एक अलग विभाग बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य में रिक्त पड़े निःशक्तता आयुक्त की शीघ्र नियुक्ति की माँग की।
दिव्यांगों की पेंशन राशि में बढ़ोतरी की माँग
बिहार नेत्रहीन परिषद के महासचिव डा नवल किशोर शर्मा ने राज्य में दिव्यांगों की उपेक्षा की बात कही। उन्होंने पेंशन राशि को चार सौ से बढ़ाकर पाँच हजार करने और उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति पुनः शुरू करने की माँग की।
अन्य वक्ताओं के विचार
समाजसेवी दीपक ठाकुर, डा रूपाली भोवाल, दिव्यांग प्राध्यापक प्रो कपिल मुनि दूबे और प्रो मधुमाला कुमारी ने भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में चिकित्सक, शिक्षक, छात्र और संस्थान के कर्मी उपस्थित थे।
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