दूसरे शब्दों में कहें तो आरबीआई ने अपने ब्याज दर को घटाकर बैंकों को आम लोगों को सस्ता कर्ज देने और पहले से कर्ज लिए लोगों की ईएमआई का बोझ कम करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस साल ये तीसरा मौका है जब RBI ने रेपो रेट में कटौती की है। इस कटौती का देश के बैंक अपने ग्राहकों को कितना लाभ देते हैं ये आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
पहले ये रेट 6 प्रतिशत था जिसे कम करके 5.5 प्रतिशत कर दिया। महंगाई दर में कमी आने के बाद RBI ने रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कटौती की है। महंगाई दर यानि मुद्रास्फीति की दर 4 फीसदी से भी नीचे 3.7 फीसदी पर आ गई है जिसके दम पर RBI ने रेपो रेट में फिर कमी कर पाया है। देश का आर्थिक विकास दर 6.5 फीसद बने रहने का अनुमान है। मुंबई में हुई मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक की समाप्ति के बाद RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को रेपो रेट में कटौती की ये घोषणा की।
इस कटौती से पहले फरवरी और अप्रैल में भी आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती की थी लेकिन तब दोनों महीनों में ये कटौती 25 बेसिक पॉइंट्स ही हुई थी। इस तरह इस साल अब तक 100 बीपीएस की कटौती रेपो रेट में हो चुकी है और इसका लाभ बैंक से कर्ज लेने वालों मिलने की उम्मीद है। अब बैंक कम ब्याज दर पर अपने ग्राहकों को कर्ज देंगे। इसके साथ ही बैंक अपने यहां से कर्ज लिए लोगों की प्रतिमाह दी जाने वाली मासिक किस्त यानि ईएमआई को कम कर सकेंगे। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और लोगों के हाथ में पैसा रहने से उससे खरीददारी करेंगे जिससे बाजार में रौनक बनी रहेगी। उदाहरण के लिए यदि किसी ने होम लोन लिया है तो बैंक या तो उसका इएमआई कम करेगा या फिर जितने महीनों में उसके किस्तों की अदायगी होनी है, वे महीने कम हो जाएंगे।
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