पढ़कर आनंद आयेगा रश्मि शर्मा का कथा संग्रह “सपनों के ढाई घर “

किताब का हिसाब : आज की पुस्तक चर्चा में कथा लेखिका रश्मि शर्मा का नवीनतम संग्रह "सपनों के ढाई घर ". पिछले दशक में झारखंड से जो रचनाकार उभरकर सामने आए हैं उनमें प्रमुख नाम रश्मि शर्मा का है. पत्रकारिता के बाद कविता के माध्यम से हिंदी साहित्य में प्रवेश करने वाली रश्मि लगभग सभी महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में छप चुकी हैं.

पुस्तक के आवरण का अंश
Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: June 26, 2025 7:30 am

रश्मि शर्मा को ‘सी एस डी एस : नेशनल इंक्लूसिव मीडिया फ़ेलोशिप, ‘सूरज प्रकाश मारवाह साहित्य रत्न सम्मान’, ‘शैलप्रिया स्मृति सम्मान’ और ‘झारखंड गौरव सम्मान’ इत्यादि प्राप्त हो चुका है. ‘बंद कोठरी का दरवाजा’ इनकी कथाओं का पहला संग्रह था. इस संग्रह में शामिल कथाओं ने हिंदी कथा साहित्य जगत में थोड़ी हलचल पैदा की थी. और अब ये दूसरा संग्रह.

हिंदी के लोकप्रिय कथाकार अवधेश प्रीत इस संग्रह के बारे में लिखते हैं, “…..रश्मि शर्मा का दूसरा कहानी संग्रह ‘सपनों के ढाई घर’ इस बात का प्रमाण है कि कथा लेखन उनके लिए एक गंभीर एवं जिम्मेदारी भरा सतत कर्म है। जाहिरन, इसका निर्वाह वह अपनी निरंतर रचनात्मकता और सार्थक हस्तक्षेप से कर रही हैं। इस संग्रह की तमाम कहानियां अपने परिवेश के प्रति उनकी सजग संवेदनशीलता और उनमें निहित अदीठ जीवन-सत्यों को खोज निकालने की उनकी दृष्टि एवं कौशल से संभव हुई है………” 167 पृष्ठ के इस संग्रह में कुल नौ कहानियां हैं. इस संग्रह की कहानियों की विशेषता यह है कि इसमें इक्कीसवीं सदी के निम्न मध्यवर्गीय परिवार के सामान्य जीवन की पूरी झलक दिखाई देती है.

प्रत्येक कहानी में कथा तत्व अदभुत है और पाठकों के लिए कौतूहल बना रहता है. चाहे पहली कहानी ‘स्टूल’ हो या अंतिम कहानी ‘सपनों के ढाई घर’. रश्मि ने कुछ सुने सुनाए किस्से को भी कहानी का रोचक रूप दिया है.’मेहरबान भूत’ एक दिलचस्प कहानी है. लगभग पूरी कहानी पढ़ते हुए उत्सुकता बनी रहती है कि भूत कब प्रकट होगा. ‘मोटिफ’ कहानी के बहाने रश्मि ने इस क्षेत्र के लोक कलाकारों और उनके जीवन शैली का बहुत यथार्थवादी चित्रण किया है . झारखंड निवासी पाठकों को बहुत से पात्र जीवंत दिखाई देने लगेंगे. ‘रिंगटोन’ इक्कीसवी सदी में घट रही घटनाओं की कहानी है. आप अपने चारों ओर ऐसी कहानी घटती देख सकते हैं.

अन्य कहानियां हैं ‘राहतें और भी हैं’, ‘मन के घेरे’,’तीज का चांद और पेट में उड़ती तितलियां ‘,’कबिरा खड़ा बाजार में’ इत्यादि. कहानियों में स्थानीय भाषा का भी प्रयोग किया गया है. संग्रह में प्रूफ की कुछ विसंगतियां दिखीं. अगर इन पर ध्यान दिया जाता तो बेहतर था. संग्रह पठनीय है एवं पाठकों को इसे पढ़कर आनंद आएगा।

पुस्तक : सपनों के ढाई घर, कथाकार : रश्मि शर्मा

पृष्ठ : 167, प्रकाशन वर्ष: 2025

प्रकाशक : लोक भारती पेपर बैक, मूल्य: रु.299.

प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

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2 thoughts on “पढ़कर आनंद आयेगा रश्मि शर्मा का कथा संग्रह “सपनों के ढाई घर “

  1. पुस्तक का परिचय इस खूबसूरती से रखा है कि पढ़ने की उत्कंठा जाग जाती है।

  2. पुस्तक का परिचय इस खूबसूरती से दिया है कि पाठक पढ़ने को उत्सुक हो उठता है।

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