राजभाषा विभाग की 50 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली स्थित भारत मंडपम् में एक दिवसीय विशाल कार्यक्रम का आयोजन गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा किया गया। इस आयोजन में देश भर के सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के राजभाषा से जुड़े करीब आठ हजार अधिकारियों एवं हिन्दीप्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन गृहमंत्री अमित शाह ने किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी अन्य भारतीय भाषाओं की शब्दावलियों को अपना कर एक सशक्त भाषा के रूप में ज्ञान, विज्ञान, बाजार और प्रशासन की भाषा बनकर उभर रही है।
इस विशाल आयोजन में कार्यक्रम स्थल पर हिन्दी सेवी संगठनों ने स्टाल के माध्यम से हिन्दी सम्बधी नवाचार की प्रदर्शनियां भी लगाई थीं। उन प्रदर्शनी स्टालों का निरीक्षण गृह मंत्री अमित शाह जी ने किया। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र की ओर भारत मंडपम् में चार प्रकार की प्रदर्शनी एक ही स्टाल पर लगाई गई थीं। उसका विषय था प्राचीन दुर्लभ पत्रिकाएं, प्राचीन मुद्रित पुस्तकें, विज्ञान, साहित्य कला विषयक पाण्डुलिपियां और संविधान सभा के सदस्यों द्वारा हिन्दी के प्रति व्यक्त उदगारों का पुस्तिका के रूप में संकलन। इस पुस्तिका निःशुल्क वितरण भी किया गया। पहली तीन प्रदर्शनी डिजिटल रुप में तीन स्क्रीन के सहारे दिखाई गई थीं। इसे केन्द्र के अकादमिक एवं राजभाषा इकाई ने गहन शोध के बाद तैयार किया था।

आईजीएनसीए के इस अनूठे स्टाल पर गृहमंत्री अमित शाह आये। उन्होंने चार से पांच मिनट रुककर प्रदर्शनी का तल्लीनता से निरीक्षण किया। आईजीएनसीए में हिन्दी सम्बधी कार्यों एवं प्रदर्शनी की विशेषताओं के बारे में प्रोफेसर अरुण भारद्वाज ने गृहमंत्री को विस्तार से बताया। इस अवसर प्रो. अरुण भारद्वाज ने गृहमंत्री अमित शाह को केन्द्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय द्वारा रचित तीन पुस्तकें भी भेंट की।
आईजीएनसीए द्वारा लगाए गए इस स्टाल अच्छी संख्या में हिन्दीप्रेमी आए। लगभग 1000-1200 लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और 150 लोगों ने रजिस्टर में अपने मत भी व्यक्त किए।
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