इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम का समापन केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री निमुबेन जयंतीभाई बामनिया की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में न केवल आयोजन को संबोधित किया, बल्कि नारी सशक्तिकरण के महत्व पर जोर देते हुए उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया। उनके विचारों ने यह स्पष्ट किया कि जब तक समाज की आधी आबादी को समान अवसर नहीं मिलते, तब तक कोई भी राष्ट्र पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो सकता।
यह आयोजन हर दृष्टिकोण से प्रेरणादायक, जानकारीवर्धक और ऊर्जा से भरपूर रहा। पूरे भारत से हज़ारों की संख्या में विद्यार्थियों, युवा प्रोफेशनल्स, शिक्षकों, महिला वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों, घरेलू महिलाओं और समाजसेवियों ने इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगोष्ठी में चर्चा के दौरान कई जीवन बदलने वाली कहानियाँ सामने आईं, जिन्होंने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। प्रदर्शनी स्टॉल्स पर तकनीकी नवाचार, सामाजिक पहल, महिला नेतृत्व की सफलता की कहानियाँ और सरकारी योजनाओं की प्रगति को देखकर आगंतुकों में गहरी समझ और गर्व की भावना उत्पन्न हुई।
कार्यक्रम में उमड़ी उत्साही भीड़ न केवल उत्साहवर्धक रही, बल्कि यह जनसहभागिता महिलाओं के नेतृत्व में विकास के प्रति जनता के विश्वास का प्रमाण भी बनी। यह संगोष्ठी एक साधारण प्रदर्शनी न होकर ज्ञान, प्रेरणा और राष्ट्र गौरव का केंद्र बन गई, जहाँ लोगों ने नई जानकारियों के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को भी गहराई से समझा।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों से यह विनम्र आग्रह किया गया कि वे इस सशक्तिकरण के संदेश को प्रदर्शनी हॉल से बाहर लेकर जाएं, और अपने परिवारजनों, मित्रों, सहकर्मियों और आस-पड़ोस के लोगों को भी इस आयोजन से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करें। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जिसे महसूस करना, अपनाना और आगे बढ़ाना हर भारतीय के लिए आवश्यक है।
इस संगोष्ठी में महिलाओं की भूमिका को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, स्वास्थ्य, चिकित्सा नवाचार, खनिज एवं ऊर्जा क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में केंद्र में रखते हुए प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रमुख संस्थानों में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP), तमिलनाडु बागवानी विकास एजेंसी (TANHODA), सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन सिद्धा (CCRS), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO), राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (GSI), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA), व्हाइट बैंड एसोसिएट्स और श्रीलालमहल ग्रुप जैसे संस्थान शामिल रहे। इन संस्थानों ने अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नवाचार को प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया।
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