FDTL नियम बने इंडिगो संकट की जड़
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने हाल ही में फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के नए नियम लागू किए थे। इनमें पायलटों और क्रू को थकान से बचाने के लिए साप्ताहिक 48 घंटे आराम अनिवार्य किया गया था। लेकिन इंडिगो के पास वर्तमान उड़ान संचालन के हिसाब से पर्याप्त पायलट और क्रू उपलब्ध नहीं थे, जिसके चलते कंपनी ने भारी संख्या में उड़ानें रद्द कर दीं। कंपनी ने सरकार को बताया कि नए नियम के कारण उसका रोस्टर गड़बड़ा गया है और परिचालन सामान्य रखना संभव नहीं हो पा रहा। इस स्थिति में यात्रियों की परेशानी बढ़ती चली गई।
सरकार और DGCA ने दी अस्थायी राहत
यात्रियों पर गहराते संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने DGCA से परामर्श के बाद कंपनी के आगे घुटने टेक दिए हैं। इंडिगो पर कार्रवाई करने के बजाय उसे कुछ नियमों में अस्थायी ढील दी है। अब पायलटों को अनिवार्य 48 घंटे साप्ताहिक आराम की जगह 36 घंटे का आराम पर्याप्त माना जाएगा। इसके अलावा, कुछ अन्य ऑपरेशनल नियमों में भी राहत दी गई है, ताकि इंडिगो अपनी उड़ानों को धीरे-धीरे सामान्य कर सके और यात्रियों को राहत मिल सके।
चार सदस्यीय जांच समिति गठित
उड्डयन मंत्रालय ने पूरे मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की है। यह समिति इंडिगो की पायलट-कमी, रोस्टर प्रबंधन और नई नियमावली लागू करने में हुई खामियों की समीक्षा करेगी। समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
यात्रियों को अब भी मुश्किलों का सामना
हालाँकि DGCA द्वारा दी गई राहत के बाद उड़ान संचालन में सुधार की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल बड़ी संख्या में यात्रियों को अब भी रद्द या विलंबित उड़ानों से जूझना पड़ रहा है। कई यात्री रिफंड, रीबुकिंग और वैकल्पिक उड़ानें न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। प्रमुख एयरपोर्टों पर अतिरिक्त सहायता केंद्र और हेल्पडेस्क लगाए गए हैं।
बड़े सवाल बने हुए हैं कायम
इंडिगो जैसे बड़े निजी विमानन ऑपरेटर के पास पर्याप्त पायलट-बल क्यों नहीं था? नए नियम लागू होने से पहले एयरलाइन ने तैयारी क्यों नहीं की? और क्या नियमों में ढील से उड़ान सुरक्षा पर असर पड़ेगा?
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