करीब 3.47 लाख करोड़ रुपये के बिहार बजट को सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ के व्यापक विकास विजन से जोड़ते हुए अगले पांच वर्षों के लिए राज्य के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का रोडमैप बताया है। बजट पेश करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकता कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और बुनियादी ढांचे के संतुलित विकास पर रहेगी।
किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
जानकारों के अनुसार, बजट का सबसे अहम संदेश किसानों की आय बढ़ाने से जुड़ा है। नकद सहायता बढ़ाकर सरकार ने एक ओर किसानों को तत्काल राहत देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर कृषि से जुड़े सहायक क्षेत्रों—डेयरी, मत्स्य पालन, मखाना और बागवानी—को मजबूत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का संकेत दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए दी जाने वाली यह सहायता छोटे और सीमांत किसानों के लिए खासतौर पर उपयोगी साबित हो सकती है।
‘सात निश्चय-3’ बना बजट की धुरी
बजट की पूरी संरचना ‘सात निश्चय-3 (2025-30)’ के इर्द-गिर्द रखी गई है, जिसे बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने का आधार माना जा रहा है। इन सात निश्चयों में—
रोजगार और आय वृद्धि,
उद्योग और निवेश को बढ़ावा,
कृषि विकास और किसान समृद्धि,
उन्नत शिक्षा और कौशल विकास,
सुलभ और मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं,
ग्रामीण-शहरी बुनियादी ढांचे का विस्तार,
प्रशासन को सरल और नागरिक-अनुकूल बनाना
शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, बजट में किए गए अधिकांश प्रावधान इन्हीं सात निश्चयों के अनुरूप तय किए गए हैं, ताकि योजनाओं और खर्च के बीच स्पष्ट तालमेल बना रहे।
विकास के साथ सामाजिक संतुलन
विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में किसानों के साथ-साथ महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों पर भी ध्यान दिया गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन को आर्थिक विकास की धुरी माना गया है। हालांकि कुछ जानकारों का यह भी मत है कि नकद सहायता के साथ-साथ सिंचाई, भंडारण, बाजार और कृषि अवसंरचना में निवेश को और तेज करना जरूरी होगा, ताकि किसानों की आय में दीर्घकालिक और स्थायी वृद्धि हो सके।
कुल मिलाकर, बिहार का यह बजट किसान-केंद्रित और विकासोन्मुख दस्तावेज के रूप में सामने आया है। सात निश्चय-3 के विजन के साथ किसानों को सालाना 9 हजार रुपये की सीधी सहायता, रोजगार और सामाजिक कल्याण पर जोर तथा बुनियादी ढांचे के विस्तार की घोषणाओं के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले वर्षों में राज्य की विकास नीति का केंद्र आम जनता और किसान ही रहेंगे।
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