भारत और मलेशिया के शीर्ष नेतृत्व ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और विस्तार देने का संकल्प व्यक्त किया और आतंकवाद के प्रति “शून्य सहनशीलता” की नीति पर जोर दिया। वार्ता में इस बात पर सहमति बनी कि रक्षा सहयोग को व्यावहारिक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण और तकनीकी साझेदारी के क्षेत्र में ठोस प्रगति हो सके। इसके साथ ही व्यापारिक रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए रास्तों की तलाश पर भी बल दिया गया।
भारत और मलेशिया के बीच आर्थिक रिश्ते लंबे समय से सक्रिय रहे हैं, लेकिन बदलते वैश्विक व्यापार परिवेश में दोनों देशों ने आपसी व्यापार को अधिक विविध और संतुलित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी से न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता को भी बल मिलेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह पहल केवल आर्थिक या सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक रणनीतिक निहितार्थ भी हैं। हिंद–प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति और आसियान देशों के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिशों के संदर्भ में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मलेशिया के साथ सहयोग से भारत को क्षेत्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा, वहीं मलेशिया को भी प्रौद्योगिकी, निवेश और सुरक्षा सहयोग के नए आयाम प्राप्त हो सकते हैं।
सुरक्षा सहयोग के संदर्भ में आतंकवाद के विरुद्ध साझा रुख पर जोर दिए जाने को विशेष महत्व दिया जा रहा है। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आतंकवाद के खिलाफ समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। यह संदेश न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी साझा प्रतिबद्धता का संकेत देता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस तरह के समझौते भारत की विदेश नीति के उस रुझान को दर्शाते हैं जिसमें बहुपक्षीय सहयोग, आर्थिक साझेदारी और सामरिक संवाद को साथ–साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनिश्चितताओं और क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच इस तरह की साझेदारी दोनों देशों को स्थिरता और विकास की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकती है।
कुल मिलाकर, भारत और मलेशिया के बीच यह सहमति केवल औपचारिक कूटनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि भविष्य की साझेदारी की ठोस रूपरेखा का संकेत देती है। रक्षा और व्यापार से लेकर डिजिटल और ऊर्जा क्षेत्र तक सहयोग के विस्तार का यह प्रयास आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों को नई गहराई और व्यापकता प्रदान कर सकता है।
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