सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा पीसीबी की अधिकांश मांगों को स्वीकार नहीं किए जाने के बाद परिस्थितियां बदलीं और संभावित आर्थिक नुकसान और अनुशासनात्मक कार्रवाई की आशंका ने भी निर्णय को प्रभावित किया। भारत-पाकिस्तान मुकाबले को वैश्विक क्रिकेट का सबसे अधिक कमाई करने वाला मैच माना जाता है और इसके न होने की स्थिति में प्रसारण अधिकार, विज्ञापन और प्रायोजन से जुड़ी बड़ी रकम दांव पर लग जाती।
विश्लेषकों का मानना है कि मैच रद्द होने पर दोनों क्रिकेट बोर्डों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग ₹200 करोड़ या उससे अधिक की राजस्व हानि हो सकती थी। हालांकि आर्थिक ढांचे के लिहाज से इसका प्रभाव अलग-अलग स्तर पर पड़ता। पाकिस्तान बोर्ड की आय संरचना का बड़ा हिस्सा आईसीसी वितरण पर निर्भर होने से उसके लिए जोखिम अधिक गंभीर माना गया, क्योंकि अनुबंध उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना या भुगतान कटौती जैसी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही थी। दूसरी ओर, भारतीय बोर्ड का वित्तीय आधार मजबूत होने के कारण उसके लिए यह नुकसान अपेक्षाकृत संभालने योग्य माना जा रहा था, हालांकि वैश्विक प्रसारण और विज्ञापन बाज़ार पर असर की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
क्रिकेट कूटनीति से जुड़े पर्यवेक्षकों का कहना है कि मैच से हटने की स्थिति में पीसीबी को न केवल आर्थिक दंड बल्कि आईसीसी मंच पर संस्थागत प्रभाव घटने और भविष्य के आयोजनों में जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता था। यही कारण रहा कि बोर्ड ने टकराव के बजाय भागीदारी का संकेत दिया, जबकि अंतिम राजनीतिक निर्णय सरकार के स्तर पर लंबित है।
खेल पक्ष पर नजर डालें तो टी20 प्रारूप में भारत का रिकॉर्ड पाकिस्तान के खिलाफ बेहतर रहा है और विश्व कप मुकाबलों में भी भारत ने बढ़त बनाए रखी है। हाल के बड़े मंचों पर मिली जीतों ने इस मुकाबले को प्रतिस्पर्धात्मक होने के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक रूप से भी अहम बना दिया है।
इस बीच क्रिकेट जगत की निगाहें अब पाकिस्तान सरकार के अंतिम रुख पर टिकी हैं। मंजूरी मिलने की स्थिति में 15 फरवरी का यह मुकाबला न केवल खेल प्रतिस्पर्धा बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक समीकरणों के कारण भी टूर्नामेंट का सबसे चर्चित आकर्षण बन सकता है।
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