तमिलनाडु में विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, द्रविड़ राजनीति का समीकरण बदला

तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से जारी अनिश्चितता आखिरकार रविवार को समाप्त हो गई, जब टीवीके प्रमुख और अभिनेता से नेता बने थलपति विजय ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें शपथ दिलाई। समारोह के दौरान हजारों टीवीके समर्थकों और कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। स्टेडियम तालियों, नारों और सीटियों की गूंज से भर उठा।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: May 10, 2026 4:29 pm

तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के गठन के बाद पहली ही विधानसभा चुनाव में विजय ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए अपनी पार्टी को सबसे बड़ी ताकत के रूप में स्थापित कर दिया। चुनाव परिणामों में टीवीके को 108 सीटें मिली थीं, जो बहुमत के आंकड़े से कुछ कम थीं। इसके बाद कांग्रेस के पांच और माकपा, भाकपा, वीसीके दो-दो विधायकों के समर्थन से विजय ने बहुमत जुटाकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। राज्यपाल से लगातार बैठकों और समर्थन पत्र सौंपने के बाद सरकार गठन का रास्ता साफ हुआ। विजय को सदन में तेरह मई को बहुमत साबित करना होगा।

फिलहाल विजय के साथ नौ मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें पार्टी महासचिव एन. आनंद (बुस्सी आनंद), पूर्व वीसीके नेता आधारव अर्जुन, पूर्व आईआरएस अधिकारी के. जी. अरुणराज, एआईएडीएमके से आए वरिष्ठ नेता के. ए. सेंगोट्टैयन, पी. वेंकटरमणन, सीटीआर निर्मल कुमार, राजमोहन अरुमुगम और टी. के. प्रभु शामिल हैं। महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर एस. कीर्तना को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विजय ने अपने पहले मंत्रिमंडल में दलित, पिछड़े वर्ग, गौंडर समुदाय, युवा चेहरों और प्रशासनिक अनुभव वाले नेताओं को शामिल कर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है।

शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी विशेष चर्चा का विषय रही। विजय ने मंच पर राहुल गांधी के साथ गर्मजोशी से मुलाकात की। राजनीतिक जानकार इसे दक्षिण भारत की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत के रूप में देख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजय को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। विजय ने इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी दोनों का समर्थन और शुभकामनाओं के लिए आभार जताया था।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार तमिलनाडु में यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि 1967 के बाद पहली बार राज्य की सत्ता पर डीएमके और एआईएडीएमके के पारंपरिक वर्चस्व से बाहर कोई नई राजनीतिक ताकत काबिज हुई है। अभिनेता से नेता बने विजय की तुलना एमजी रामचंद्रन और जयललिता जैसे करिश्माई नेताओं से की जा रही है।

शपथ ग्रहण के साथ ही अब विजय सरकार के सामने चुनावी वादों को पूरा करने, प्रशासनिक संतुलन बनाने और गठबंधन सहयोगियों को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। हालांकि फिलहाल तमिलनाडु में ‘थलपति’ के सत्ता संभालने को लेकर समर्थकों में भारी उत्साह और नई उम्मीदों का माहौल दिखाई दे रहा है।

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