यह हादसा अलीगंज के उषा मेहता मार्ग स्थित उस व्यावसायिक इमारत में हुआ, जहां कोचिंग/एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर के साथ अन्य प्रतिष्ठान भी संचालित थे। दोपहर बाद लगी आग ने देखते-देखते पूरी इमारत को चपेट में ले लिया। अग्निकांड में धुएं और लपटों के बीच फंसे कई लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपर से छलांग लगाई। राहत एवं बचाव अभियान के बाद घायलों और मृतकों को अस्पताल पहुंचाया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में 22 लोगों को लाया गया, जिनमें 15 को मृत घोषित किया गया।
हादसे के बाद सरकार की शुरुआती कार्रवाई सीधे जवाबदेही तय करने की दिशा में दिखी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित किया गया, इनमें बिजली विभाग के जानकीपुरम के एक्सईएन गौरव कुमार, लखनऊ विकास प्राधिकरण के असिस्टेंट और जूनियर इंजीनियर क्रमश: अनिल कुमार और प्रमोद कुमार के अलावा अग्निशमन विभाग के इंदिरा नगर के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह शामिल हैं। जबकि कोचिंग संचालकों रामकृष्ण उपाध्याय, तूशाक कृष्ण जायसवाल की गिरफ्तारी की खबर है। साथ ही, एसआईटी को यह पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि इमारत में अग्नि-सुरक्षा मानकों, आपात निकास और भवन-उपयोग नियमों का पालन हुआ था या नहीं। यही जांच अब इस त्रासदी के प्रशासनिक और कानूनी पहलू तय करेगी।
आग लगने के कारण को लेकर अभी अंतिम तस्वीर साफ नहीं है। अलग-अलग रिपोर्टों में शॉर्ट सर्किट, तकनीकी खराबी या भूतल से आग फैलने जैसी आशंकाएं जताई गई हैं, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक कारण जांच के बाद ही तय होगा। फिलहाल इतना जरूर सामने आया है कि आग तेजी से फैली और घना धुआं बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बना।
राज्य सरकार ने अग्निकांड के मृतकों के परिजनों के लिए पांच-पांच लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। यह हादसा एक बार फिर कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों और मिश्रित उपयोग वाली इमारतों में फायर सेफ्टी और नियामकीय निगरानी की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर गया है।
ये भी पढ़ें : –दिल्ली: मालवीय नगर के होटल में आग से 21 मरे, मृतकों में अधिकांश विदेशी