आईजीएनसीए ने देहरादून में आयोजित की ‘सौहार्द’ एवं ‘सचित्र संविधान दर्शन’ प्रदर्शनी

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) का कला दर्शन विभाग, संस्कार भारती उत्तराखंड तथा ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय के सहयोग से 5 से 7 अगस्त 2026 तक ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय, देहरादून परिसर में 'सौहार्द' एवं 'सचित्र संविधान दर्शन' प्रदर्शनी का आयोजन किया।

Written By : डेस्क | Updated on: August 7, 2026 11:18 pm

प्रदर्शनी का उद्घाटन सुप्रसिद्ध लोक गायिका एवं संगीतकार पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तबस्सुम नक़वी, विधायक एवं उत्तराखंड संस्कार भारती की अध्यक्ष सविता कपूर, आईजीएनसीए कला दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष एवं प्रदर्शनी की संयोजिका डॉ. ऋचा काम्बोज, श्री गिरीश चन्द्र शर्मा,  संस्कार भारती उत्तराखंड प्रांत कार्यकारी अध्यक्ष  डॉ. आनंद करमाकर, कुलदीप विनायक तथा रोशन लाल अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

भारत प्राचीन काल से ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के आदर्श में विश्वास करता आया है। ‘सौहार्द’ प्रदर्शनी इसी भारतीय सभ्यतागत दृष्टि को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है तथा यह दर्शाती है कि सद्भाव, सहअस्तित्व और पारस्परिक सम्मान की भावना भारतीय समाज का अभिन्न अंग रही है।

‘सचित्र संविधान दर्शन’ प्रदर्शनी भारत की समृद्ध एवं विविधतापूर्ण सामाजिक सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिम्बित करती है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शकों को उन विशिष्ट कलाकारों के योगदान से परिचित होने का अवसर प्राप्त होता है, जिनकी कलाकृतियाँ भारत के मूल संविधान को अलंकृत करती हैं। इनमें नंदलाल बोस सहित अनेक प्रतिष्ठित कलाकारों, विशेषकर महिला कलाकारों, की रचनाएँ शामिल हैं, जिन्होंने संविधान की मूल प्रति को भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्ति से समृद्ध बनाया।

ये दोनों प्रदर्शनियाँ मिलकर दर्शकों को कला के माध्यम से भारत के सौहार्द, सांस्कृतिक विविधता और संवैधानिक चेतना जैसे शाश्वत मूल्यों से जुड़ने का अवसर प्रदान करती हैं। भारतीय सभ्यता के आदर्शों और कलात्मक उत्कृष्टता को एक साथ प्रस्तुत करते हुए ये प्रदर्शनियाँ भारत की सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक दृष्टि के गहरे संबंध को रेखांकित करती हैं।

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