आरक्षण विरोध की हुंकार : जंतर-मंतर से पुलिस-आरएएफ ने खदेड़ा, कई हिरासत में

जातीय आधार पर आरक्षण के खिलाफ 21 अगस्त शुक्रवार को राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर उस समय रणक्षेत्र में बदल गया, जब ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग पुलिस की अनुमति नहीं होने के बावजूद वहां पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरक्षण का आधार जाति नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति हो। भीड़ बढ़ती गई तो दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है।

जातीय आरक्षण हटाने की मांग से साथ जंतर मंतर पर उमड़ी भीड़ को काबू में करने में जुटी दिल्ली पुलिस
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: August 21, 2026 11:43 pm

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से एक दिन पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसी प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर अनुमति मिलने संबंधी दावों को भी गलत बताया था। इसके बावजूद आरक्षण विरोध के लिए शुक्रवार सुबह से ही देश के विभिन्न हिस्सों से लोग जंतर-मंतर पहुंचने लगे।

जंतर-मंतर पर बढ़ती गई भीड़

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में जाति के बजाय आर्थिक पिछड़ेपन को आधार बनाया जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, क्रीमी लेयर लागू करने और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को जाति से परे सरकारी सहायता देने की मांग उठाई।

जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से हटाने की कोशिश शुरू की। कई प्रदर्शनकारी वहां से हटने को तैयार नहीं हुए। स्थिति बिगड़ने पर RAF को भी मौके पर बुलाया गया। बाद की तस्वीरों और वीडियो में पुलिस तथा RAF द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेते हुए देखा गया।  महिलाओं और बच्चों समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने पहुंचे थे और उन्हें जबरन हटाया गया।

रामलीला मैदान जाने को तैयार नहीं हुए प्रदर्शनकारी

दरअसल, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के बजाय रामलीला मैदान में अधिकतम 500 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी थी। अनुमति में समय और अन्य शर्तें भी निर्धारित थीं। पुलिस की ओर से यह वैकल्पिक व्यवस्था इसलिए की गई थी ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।

लेकिन आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा हिस्सा रामलीला मैदान जाने के बजाय जंतर-मंतर पहुंच गया। उनका कहना था कि आंदोलन का घोषित स्थल जंतर-मंतर ही है। दोपहर बाद निर्धारित समय समाप्त होने के बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर डटे रहे, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की।

सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा आंदोलन

‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ की अपील पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर चल रही थी। आंदोलनकारियों ने इसे जातीय आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव की मांग से जोड़ते हुए लोगों से 21 अगस्त को दिल्ली पहुंचने की अपील की थी। शुक्रवार को इसका असर जंतर-मंतर पर दिखाई दिया और बड़ी संख्या में लोग जुटे। मीडिया रिपोर्टों ने इसे आंदोलन की अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक लामबंदी के रूप में देखा है।

प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा UGC के नए इक्विटी संबंधी प्रावधान भी रहा। प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था जाति आधारित पहचान को और मजबूत करती है। इसके अलावा SC/ST से जुड़े कानूनों और उनके कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी प्रदर्शन के दौरान उठाया गया।

पुलिस का तर्क

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी। प्रशासन ने पहले ही वैकल्पिक स्थल के तौर पर रामलीला मैदान में सीमित संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी थी। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर भीड़ जुटने और निर्धारित समय के बाद भी लोगों के वहां बने रहने के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पुलिस और RAF को कार्रवाई करनी पड़ी।

शुक्रवार की घटना ने जातीय आरक्षण को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर राजधानी के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ प्रदर्शनकारी आरक्षण का आधार आर्थिक करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे हैं, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के समर्थक सामाजिक और ऐतिहासिक पिछड़ेपन को इसका आधार मानते रहे हैं। जंतर-मंतर की घटना ने इस बहस को राजनीतिक और सामाजिक रूप से फिर तेज कर दिया है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

-जातीय आरक्षण की जगह आर्थिक आधार को आरक्षण का प्रमुख आधार बनाया जाए।
-आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को जाति से परे आरक्षण और सरकारी सहायता का लाभ मिले।
-आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए।
-आरक्षण में क्रीमी लेयर का प्रभावी प्रावधान लागू किया जाए।
-SC, ST और OBC से संबंधित आरक्षण नीतियों की समीक्षा की जाए।
-आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को फीस, छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता दी जाए।
-प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग की मांग है कि SC/ST कानून के कथित दुरुपयोग पर रोक के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए।
-UGC के नए इक्विटी संबंधी प्रावधानों को वापस लेने अथवा उनकी समीक्षा करने की मांग।
सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए आर्थिक स्थिति को महत्वपूर्ण मानदंड बनाया जाए।

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