Book Review : ‘एक मधुर सपना’ संग्रह की पहली कहानी इसी नाम की कहानी है. यह कहानी पहले ‘हंस’ पत्रिका द्वारा पुरस्कृत हुई थी और छपी थी. इस कहानी संग्रह के कहानीकार प्रेमरंजन अनिमेष हिंदी के प्रतिष्ठित कवि और कथाकार हैं. इनकी आठ हिंदी कविता संग्रह और दो कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. इनका हिंदी उपन्यास ‘स्त्रीगाथा’और बच्चों के लिए कविता संग्रह “माँ का जन्मदिन” भी प्रकाशित है.
कुल 167 पृष्ठों वाले इस संग्रह में हैं 9 कहानियां, सभी पठनीय
इन्हें कविता के लिए ” भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार ” से भी सम्मानित किया जा चुका है. इस संग्रह में कुल नौ कहानियां हैं: एक मधुर सपना, कागज का हवाई जहाज, संवाद, न खोली गई चिट्ठी , हजामत, विस्फोट,वह आदमी कभी भी मारा जा सकता है, बाल चिकित्सक और जानी है जब जान पियारे . ‘पुस्तकनामा ‘ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस कहानी संग्रह में कुल 167 पृष्ठ है.पुस्तक की कीमत रु.299 है. पुस्तक की छपाई और साज सज्जा बहुत आकर्षक है. पुस्तक पठनीय और संग्रणीय है.
लघु फिल्म देखने का अहसास कराती हैं कहानियां
Book Review की दृष्टि से कहें तो कहानीकार अनिमेष की सभी नौ कहानियों की भाषा और मिज़ाज़ अलग-अलग हैं. प्रत्येक कहानी के भीतर भी एक छोटी समानांतर कहानी चलती रहती है. कहानी पढ़ते हुए लगता है मानो आप कोई लघु फ़िल्म देख रहे हों. कहानियों की भाषा सरल और वर्णन बहुत चुस्त है. कहीं ऐसा महसूस नहीं होता कि शब्दों का अपव्यय किया गया है.अनिमेष अपनी बात व्यंग्य, कटाक्ष और किस्सों के सहारे भी करते हैं. लोकार्पण के अवसर पर हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक रवि भूषण ने इनकी कहानियों में नाई, स्वप्न, हवाई जहाज़, मृत्यु और राष्ट्रपति जैसे शब्दों के बार- बार आने को महत्वपूर्ण बताया.
प्रतीक के रूप में स्वप्न का उपयोग
पहली कहानी ‘एक मधुर सपना’ का एक वाक्य देखिये “…….मैं तो पूरी कहानी एक अनोखे परिवेशमें रचना चाहता-जादुई यथार्थ में ” प्रेम की कहानियाँ एक खास परिवेश में जादुई यथार्थ की कहानियाँ हैं. प्रेम ने इस संग्रह में प्रतीक के रूप में ‘स्वप्न’ का उपयोग किया है. कोई सपना क्यों और कैसे देखता है. एक निम्नवर्गीय नाई का स्कूल जाने वाला बेटा सपने में देश के राष्ट्रपति से मिलता है. राष्ट्रपति भी विदेश यात्रा से पूर्व अपने देश के गांववासियों से मिलना चाहते है. सरल शब्दों में प्रेम रंजन अनिमेष का कटाक्ष मारक है. संग्रह की एक अन्य कहानी ‘कागज का हवाई जहाज’ समकालीन समाज के सारे परिवेश की झलक दिखा जाता है. यहाँ एक पांच साल का बालक भी युवक जैसा व्यवहार करता है.

(पुस्तक के समीक्षक प्रमोद कुमार झा रांची दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक हैं और कला व साहित्य के राष्ट्रीय स्तर के मर्मज्ञ हैं।)
ये भी पढ़ें :-किताब का हिसाब: पठनीय है डॉ. राशि सिन्हा की 5 कहानियों का ‘स्वप्न वृक्ष’