कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत विकास परिषद् के उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री विक्रांत खंडेलवाल ने की। मुख्य अतिथि थे दिल्ली नगर निगम की शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा, जबकि विशिष्ट अतिथि थे दिल्ली नगर निगम के उप-महापौर जय भगवान यादव और स्वागत वक्तव्य आईजीएनसीए के जनपद सम्पदा प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार ने दिया। सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. के. अनिल कुमार ने कहा कि यह पुस्तक केवल संविधान के बारे में ही नहीं बताती, बल्कि हमारी संस्कृति के बारे में भी बात करती है।
पुस्तक के लेखक मुकेश भारद्वाज ने पुस्तक की भावना और उसकी रचना प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के लेखन में ढाई वर्ष का समय लगा। उन्होंने कहा, जब मैंने संविधान पर छपे हुए चित्रों का अध्ययन किया तो समझ में आया कि ये चित्र वैज्ञानिक वैदिक सभ्यता, सनातन संस्कृति और राष्ट्रवादी परम्पराओं की याद इस देश के नागरिकों को दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी से प्रेरित होकर मैंने यह पुस्तक लिखी।
अध्यक्षीय संबोधन में विक्रांत खंडेलवाल ने कहा, हमारे देश के क्रमिक विकास को इन चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। इतिहास दो चीज़ों को याद रखता है। एक किसी द्वारा किए गए निर्माण को, और दूसरा, किसी द्वारा लिखी गई रचना को। इसलिए समाज के हित के लिए कुछ बनाकर जाएं और समाज के हित के लिए कुछ लिख कर जाएं। इस अर्थ में, मुकेश भारद्वाज ने इस पुस्तक को लिखकर अपना ऋण चुकाया है। इस पुस्तक में संविधान में शामिल चित्रों की सुंदर व्याख्या की गई है। इस पुस्तक को अवश्य पढ़ना चाहिए।
योगेश वर्मा ने कहा, संविधान पर तो खूब बात होती है, लेकिन इसमें शामिल चित्रों के बारे में चर्चा नहीं होती। यह पुस्तक उस अभाव की पूर्ति करती है। वहीं श्री जय भगवान यादव ने कहा, हमारी सनातन सभ्यता की रक्षा का दायित्व हम सभी का है। इस पुस्तक के माध्यम से मुकेश भारद्वाज ने अपना दायित्व निभाया है। अंत में, अभिषेक शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में विद्वानों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा संस्कृति-प्रेमी नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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