किताब का हिसाब : रवीन्द्र नाथ टैगोर के ‘कबीर के सौ पद’ को रणजीत साहा ने दिया नया रूप

किताब का हिसाब साप्ताहिक कॉलम में आज एक बहुत रोचक किताब है. गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने काफी मनन के बाद कबीर की सौ कविताओं का अनुवाद अंग्रेज़ी में किया था प्रस्तुत पुस्तक में उन सभी कविताओं का मूल रूप, अंग्रेज़ी अनुवाद और सरल हिंदी में अनुवाद तीनों किया गया है. इस महत्वपूर्ण ग्रंथ के अनुवाद और संपादन का कार्य हिंदी के सुपरिचित विद्वान, बहुभाषाविद अनुवादक लेखक रणजीत साहा ने किया है.

Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: January 29, 2025 11:46 pm

सर्व विदित है कि आचार्य हज़ारीप्रसाद द्विवेदी को गुरुदेव रवींद्रनाथ नाथ टैगोर ने ही सर्वाधिक प्रेरित किया था कबीर पर गहन शोध के लिये . कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि आचार्य द्विवेदी की विद्वत्ता, मेधा और क्षमता को देख कर ही गुरुदेव उन्हें बनारस हिंदी विश्वविद्यालय से विश्वभारती ले गए थे !  ‘कबीर के सौ पद’ नाम की इस पुस्तक की एक और विशेषता है अंग्रेज़ी संस्करण में लिखी प्रसिद्ध विद्वान एवलिन अंडरहिल की भूमिका. रणजीत साहा जी उसका भी सुन्दर अनुवाद प्रस्तुत किया है. एवलिन अंडरहिल की प्रारंभिक कुछ पंक्तियों का अनुवाद देखिये : “भारतीय रहस्यवाद के इतिहास में, कविवर कबीर का व्यक्तित्व अत्यंत आकर्षक और प्रभावशाली रहा है और जिनके पदों का संग्रह पहली बार अंग्रेज़ी के पाठकों के लिए किया जा रहा है।

संभवतः सन 1440 में लगभग बनारस केआसपास मुस्लिम माता-पिता के यहां उनका जन्म हुआ था।जीवन के आरम्भिक दौर में ही,वे प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी रामानंद के शिष्य बन गए थे।” पंद्रह पृष्ठों में लिखी अंडरहिल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है और उसका बहुत प्रभावशाली अनुवाद रणजीत साहा जी ने प्रस्तुत किया है . इसके बाद स्वयं रणजीत साहा जी ने सोलह पृष्ठों में अपनी बात “कबीर के रवींद्र:रवींद्र के कबीर ” शीर्षक में कही है. सारे के सारे अनुवाद और सरलीकरण अति प्रभावशाली हैं . इस पुस्तक को पढ़कर कबीर को जानने और समझने में तो सहूलियत होगी ही ,इस बात का भी अनुमान हो जाएगा कि पश्चिम के विद्वान कबीर की साखियों और विचारों से परिचित और प्रभावित थे और गुरुदेव रवींद्रनाथ को इंग्लैंड में अध्ययन काल में कबीर के बारे में पता चला था और उनकी रुचि बढ़ी थी.

रणजीत साहा लिखते हैं: ‘रवींद्रनाथ द्वारा कबीर के पदों का अंग्रेज़ीमें अनुवाद किया जाना कोई आकस्मिक या प्रयोजित कार्य नहीं था।यह कबीर के व्यक्तित्व और उनकी रचनाओं,विशेषकर पदों से प्रभावित होकर, बाहत व्यवस्थित ढंग से और विशेषज्ञों के परामर्श लेकर किया गया काम है।” दो सौ तेईस पृष्ठ के अंत में गुरुदेव रवींद्रनाथ द्वारा कबीर पर लिखी कविता का रणजीत साहा जी ने प्रभावशाली अनुवाद भी संलग्न किया है.

इस पुस्तक से कबीर के पद को देखिए: “संतन जात न पूछो निरगुनियाँ। साध ब्राह्मण, साध छत्तरी,साढ़े जाती बनियाँ। साधन माँ छत्तीस कौम है, टेढ़ी तोर पुछनियाँ।।” पुस्तक की छपाई बहुत आकर्षक है . पुस्तक अति पठनीय और संग्रहणीय है.कबीर पर यह बहुत ही प्रामाणिक पुस्तक है।

पुस्तक:कबीर के सौ पद

लेखक :रवींद्रनाथ ठाकुर,

अनुवाद एवं संपादन:रणजीत साहा,

प्रकाशन: राधाकृष्ण पेपरबैक, पृष्ठ:223, मूल्य:  299 रुपये

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

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