राधा की माँ के अचानक गुजर जाने के बाद उसे सड़कों पर बेसहारा छोड़ दिया गया था। गौ संस्कृति ने उसे अपना लिया। इसी दौरान एक विचार कौंधा कि क्यों न एक ऐसी जगह बनाई जाए जहाँ गाय और इंसान दोनों के लिए प्यार, सह-अस्तित्व और सम्मान का माहौल बने? राधा की प्रेरणा से आई इसी सोच से ‘गौ आँगन’ की शुरुआत हुई।
‘गौ आँगन’ देश का पहला और अनोखा ‘काफ़ कैफ़े’ (Calf Café) है। यहाँ गाय और बछिया के साथ बैठकर लोग कैफे में उपलब्ध ताज़ा, शुद्ध, गर्मागर्म और देसी स्वाद का छक कर आनंद ले सकते हैं। यहाँ गाय के दूध से बने पारंपरिक व्यंजन और ऑर्गेनिक उत्पाद परोसे जाते हैं। ये उत्पाद और व्यंजन सिर्फ़ शरीर को पोषण ही नहीं देते हैं, बल्कि दिल और दिमाग को भी सुकून देते हैं।’गौ आँगन’ का लक्ष्य है कि हर निराश्रित यानी बेसहारा गाय को एक घर मिले और हर इंसान के जीवन में गौमाता के लिए प्यार बढ़े। इसलिए इसका टैगलाइन है : “गौ आँगन दुकान नहीं, एक अभियान है।”
गौ संस्कृति की संस्थापक टीम का कहना है, “हमने देखा कि शहरों में लोग गायों से दूर हो गए हैं। हमारी कोशिश है कि इस कैफ़े के माध्यम से फिर से गौवंश के साथ लोगों का जुड़ाव बने और बढ़े। जब कोई कैफे में आकर राधा को देखता और उसके साथ बैठता है, तो उसे महसूस होता है कि गाय सिर्फ़ दूध ही नहीं, बल्कि प्रेम और प्रगति की प्रतीक भी हो सकती हैं।”
कैफ़े में आने वाले कई गणमान्य और सामान्य लोगों ने इसे आधुनिक डिज़ाइन और ग्रामीण आत्मा का सुंदर संगम बताया है। उनका कहना है कि इस जगह पर मिट्टी की खुशबू, देसी संगीत और ताज़े व्यंजनों की महक एक अलग तरह का पवित्र अहसास करवाती हैं। यहां आने वाला हर विजिटर एक दाता और गौ-परिवार का एक सदस्य जैसा बन जाता है। उनके लिए व्यंजनों के हर बाइट और हर घूँट के साथ गौ माता का स्नेह और आशीर्वाद महसूस होता है।
इस अभियान से जुड़ी टीम के वरिष्ठ सदस्य अंकुर गौरव का कहना है कि आने वाले समय में ‘गौ-आँगन’ के माध्यम से ‘गौवंश के संरक्षण और संवर्धन ही नहीं, बल्कि उनके स्वालंबन के लिए प्रयासों को और तेज किया जाएगा। इसके साथ ही ‘सस्टेनेबल लिविंग’ से जुड़े कई अभियानों की शुरुआत भी की जाएगी। उनका कहना है कि सड़कों पर भटक रहीं गायों को बेहतर स्थानों पर सुरक्षित और सम्मानपूर्ण जीवन देना ही गौ संस्कृति परिवार का स्पष्ट उद्देश्य है।
‘गौ-आँगन’ के माध्यम से जैसे-जैसे राधा और उसके जैसे दूसरे बछिया और बछड़े की इमोशनल कहानी फैल रही है, वैसे-वैसे यह कैफे एक नई सोच का प्रतीक बन गया है। यहाँ अलग-अलग गायों का दूध उनके नाम के साथ उपलब्ध होता है। ‘गौ-आँगन’ने काऊ-हग के नाम से गाय और बछिया को गले लगाने का नया और अनोखा अभियान भी शुरू किया है। इसे दुनिया भर में तेजी से फैल रहे आलिंगन-थेरेपी से जोड़ा जा रहा है।
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