मुंबई: महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की बड़ी जीत के बादभाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ शिवसेना के एकनाथ शिंदे और एनसीपी के अजित पवार उपमुख्यमंत्री बने। 288 सीटों वाली विधानसभा में महायुति ने 235 सीटें जीतीं, जिसमें बीजेपी ने 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर मुख्यमंत्री पद का दावा मजबूत किया।
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद, फडणवीस ने राज्य के विकास के लिए काम करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “हम महाराष्ट्र के विकास के लिए काम करेंगे और इसे रोकने नहीं देंगे।” शिंदे की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “दिशा और गति वही है, केवल हमारी भूमिकाएं बदली हैं। हम महाराष्ट्र के हित में फैसले लेंगे।”
पहला फैसला और ऐतिहासिक वादा पूरा
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद फडणवीस, शिंदे और पवार ने छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बीआर आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद फडणवीस ने मुख्यमंत्री के रूप में पहला निर्णय लेते हुए एक चिकित्सा सहायता फाइल पर हस्ताक्षर किए।
देवेंद्र फडणवीस अब तक छह बार विधायक रह चुके हैं और तीन बार मुख्यमंत्री बने हैं। 2019 में सत्ता से बाहर होने के बावजूद उन्होंने “वापसी” का वादा किया था। अपने वादे को याद करते हुए उन्होंने कहा था, “पानी उतरता देख मेरे किनारे घर मत बना लेना। मैं समंदर हूं, लौटकर वापस आऊंगा।”
महायुति की जीत और फडणवीस की रणनीति
बीजेपी, शिंदे गुट और अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी के समर्थन ने इस बार महायुति को बड़ी जीत दिलाई। 75 सीटों पर बीजेपी की नई रणनीति और गठबंधन ने विपक्षी महा विकास आघाड़ी को 49 सीटों पर सिमटा दिया।
बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री पद पर फडणवीस की दावेदारी मजबूत हो गई। हालांकि, शिंदे गुट ने भी मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन बीजेपी और अजित पवार गुट के समर्थन के बाद शिंदे के पास सीमित विकल्प बचे।
शिंदे की नाराजगी और अंतिम फैसला
चुनाव के बाद शिंदे ने मुख्यमंत्री पद पर जोर दिया, लेकिन विवादों और नाराजगी के चलते उन्होंने 48 घंटे अपने गृहनगर सतारा में बिताए। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की और आखिरकार नई सरकार का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो गए।
कैबिनेट में बड़े बदलाव की संभावना
शिंदे गुट को लगभग 12 कैबिनेट पद मिलने की संभावना है। इनमें गृह मंत्रालय, जल संसाधन और लोक निर्माण विभाग जैसे अहम मंत्रालय शामिल हो सकते हैं, लेकिन गृह मंत्रालय पर अभी भी फडणवीस का अधिकार रहने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र की राजनीति में यह बदलाव बीजेपी की दूरदर्शी रणनीति और फडणवीस के नेतृत्व की ओर इशारा करता है। अब यह देखना होगा कि यह नई सरकार राज्य के विकास के लिए किस दिशा में काम करती है।
