अपने कुछ व्यक्तिगत लाभ और स्वार्थ के लिए अपने देशवासियों के शोषण और उत्पीड़न में अंग्रेजों के मातहत रहकर उन्हें सहयोग करते रहे. पूरे देश में जनजातीय क्षेत्र के लोगों ने करीब- करीब सभी जगह अंग्रेजों का दृढ़ता से विरोध किया था. इसमें में भी बिडम्बना है कि उनके बीच ही मुखबिरों को भेजकर लगभग उन सारे ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ को देर सबेर पकड़ा गया और उन सबों को सज़ा दी गयी, अधिकतर तो फांसी ही दी गयी ! झारखंड के वीर शहीद में उनकी ही कहानी है।
आज़ादी के बाद से इस दिशा में लोगों ने सोचना शुरू किया और छोटे क्षेत्रीय स्तर पर लोगों के योगदान को भी रेखांकित किया जाने लगा. झारखंड क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों पर भी पत्रकारों और इतिहासकारों ने लिखना शुरू किया. लगभग तीन दशकों तक गम्भीर पत्रकारिता करने वाले इस प्रदेश के ही मूल निवासी डॉ. विनय कुमार पांडेय ने इस महत्वपूर्ण पुस्तक की रचना की है.
पुस्तक के प्रारंभ में हिंदी के उद्भट विद्वान, शोधकर्ता डॉ महाकालेश्वर प्रसाद लिखते हैं कि ‘डॉ.विनय कुमार पांडेय ने अठारहवीं शती के उत्तरार्द्ध के वीर शहीद रघुनाथ महतो से लेकर बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध के वीर शहीद जतरा टाना भगत तक के कुल सोलह वीर शहीदों की गाथाएं अपनी पुस्तक ‘झारखंड के वीर शहीद’ में संकलित की है और इस पुस्तक को एक रोचक अंजाम तक पहुंचाया है.’ इस पुस्तक में 1.रघुनाथ महतो 2.तिलका मांझी 3.तेलंगा खड़िया 4.कुर्जी मानकी 5. पोटो सरदार 6.बुधु भगत 7.अर्जुन सिंह-जग्गू दीवान 8.गोनो पिंगुआ 9.नीलाम्बर-पीताम्बर 10.फूलो -झानो 11. ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव 12. पांडेय गणपत राय 13.शेख भिखारी 14. धरती आबा 15. गया मुंडा और 16.जतरा टाना भगत के बारे में अलग- अलग बताया गया गया है.
लेखक ने सराहनीय कार्य किया है. युवा पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी साबित होगी. इस प्रकार की बहुत सारी पुस्तकें लिखी जानी चाहिए. 192 पृष्ठ के इस हार्ड बाउंड पुस्तक में लेखक ने बस एक झलक दिखाई है. थोड़ा विस्तार देने की संभावना तो थी! पुस्तक संग्रहणीय और पठनीय है. विनय जी की भाषा प्रांजल है.
पुस्तक : झारखंड के वीर शहीद, लेखक: डॉ. विनय कुमार पांडेय
प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन, मूल्य: 400 रुपये

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)
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आज के दौर में इस तरह की पुस्तक की बहुत आवश्यकता है..आपने सुंदर समीक्षा की है..साधुवाद!!
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