पूर्वोत्तर में हिन्दी के विकास के लिए नागालैंड में की गयी साहित्य सम्मेलन की स्थापना

पूर्वोत्तर में हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास के लिए नागालैंड में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना की गयी है। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ की प्रेरणा से, उनकी उपस्थिति में शनिवार की संध्या दीमापुर के संतोषी माता मंदिर के प्रांगण में आयोजित स्थानीय हिन्दी सेवियों और हिन्दी-प्रेमियों की एक सभा में, विधिवत इसकी स्थापना का निर्णय लिया गया।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: December 22, 2024 11:33 pm

नगर के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित हिन्दी-आचार्य रुद्रनाथ ठाकुर की अध्यक्षता में 21 सदस्यीय कार्य समिति का गठन किया गया। लोकप्रिय शिक्षक और समाजसेवी सुमन कुमार मोदी को नवगठित संस्था का प्रधानमंत्री बनाया गया है।

सभा के आरम्भ में, मंदिर के प्रधान-पुरोहित पण्डित पंकज शास्त्री ने सभा में उपस्थित गण्य-मान्य व्यक्तियों की ओर से डा सुलभ का उत्साहपूर्वक अभिनन्दन किया । नगर के सुप्रसिद्ध समाजसेवी और हिन्दी-प्रेमी राम सुदीश भगत ने डा सुलभ और बिहार और उत्तरप्रदेश से पधारे वरिष्ठ कवियों और कवयित्रियों प्रो शशि कुमार सिंह ‘प्रेमदेव’, प्रदीप भट्ट, अनीता प्रसाद और अमीना खातून को अंग-वस्त्रम प्रदान कर स्वागत किया।

अपने संबोधन में डा सुलभ ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के संग्राम में तब के अमर बलिदानियों ने संपूर्ण भारतवर्ष में एक भाषा न होने का जो अभाव अनुभव किया था और जिसे आंदोलान की सबसे बड़ी बाधा मानी गयी थी, भारत की एकता और ऊन्नति की दिशा में आज हो रहे प्रयासों में भी वही बाधा सामने आ रही है। यह दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष व्यतीत हो जाने पर भी भारत की कोई एक राष्ट्रभाषा नही बनायी जा सकी है। कुछ थोड़े से स्वार्थी राजनेताओं की संकीर्णता के कारण सर्वाधिक महत्त्व का यह कार्य अब भी शेष पड़ा है। उन्होंने पूर्वोत्तर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार की अनिवार्यता बताते हुए कहा कि हिन्दी एक सरल और वैज्ञानिक भाषा है और यही पूर्वोत्तर समेत संपूर्ण भारतवर्ष को एकता प्रदान करेगी। जब भारत एक होगा तो समृद्ध होगा। इसलिए इन प्रदेशों में हिन्दी के विकास का कार्य ‘देश-सेवा’ मानकर किया जाना चाहिए।

उपस्थित प्रबुद्ध व्यक्तियों ने हर्ष के साथ डा सुलभ के विचारों और प्रस्ताव का समर्थन किया तथा सर्वसम्मति से नागालैंड हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना का निर्णय लिया। सर्वसम्मति से नगर के वरिष्ठ हिन्दी-आचार्य रुद्रनाथ ठाकुर की अध्यक्षता में नवगठित संस्था की संस्थापक कार्यसमिति का गठन किया गया। लोकप्रिय शिक्षक और समाजसेवी सुमन कुमार मोदी को सम्मेलन का प्रधानमंत्री चुना गया। पण्डित उमाशंकर तिवारी उर्फ़ पंकज शास्त्री तथा दिनेश कुमार चौधरी को उपाध्यक्ष, वरिष्ठ हिन्दी आचार्य अजीत कुमार झा को साहित्यमंत्री, राम सुधीश भगत को अर्थमंत्री, नंद किशोर ठाकुर को प्रबंधमंत्री, संतोष सिंह को प्रचार मंत्री तथा सिमी सिंह को कलामंत्री बनाया गया है। वरिष्ठ हिन्दी आचार्य राधे श्याम मिश्र, किरण देवी, विकास मिश्र, अमरजीत गुप्ता, प्रिया कुमारी, रूपा कुमारी गुप्ता, अंजलि दास, चंदन कुमार गुप्ता, दीपक कुमार शर्मा, प्रशांत कुमार सिंह, राज जायसवाल तथा दिलीप कुमार को कार्यकारिणी सदस्य के रूप में स्थान प्राप्त हुआ।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि, अगले वर्ष सम्मेलन का अधिवेशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रांत के सभी ज़िलों से हिन्दी-सेवी और हिन्दी-प्रेमियों के साथ देश के मनीषी साहित्यकारों को आमंत्रित किया जाएगा और हिन्दी-सेवी सम्मानित किए जाएँगे। शीघ्र ही नागालैंड के सभी ज़िलों में ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन का भी गठन कर लिया जाएगा।

नवगठित संस्था के अध्यक्ष रुद्रनाथ ठाकुर के कृतज्ञता-ज्ञापन तथा प्रधानमंत्री सुमन कुमार मोदी द्वारा सबके प्रति धन्यवाद-ज्ञापन के पश्चात सभा संपन्न हुई। सभा की समाप्ति के पश्चात डा सुलभ के सम्मान में, श्री ठाकुर के आवास पर रात्रि-भोज का आयोजन किया गया।

ये भी पढ़ें :-मंदिर-मस्जिद विवाद स्वीकार्य नहीं: मोहन भागवत

One thought on “पूर्वोत्तर में हिन्दी के विकास के लिए नागालैंड में की गयी साहित्य सम्मेलन की स्थापना

  1. **back biome**

    Mitolyn is a carefully developed, plant-based formula created to help support metabolic efficiency and encourage healthy, lasting weight management.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *