यह बातें सोमवार को विश्व फ़िज़ियोथेरापी दिवस (World Physiotherapy Day) पर, बेउर स्थित इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ़ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए, संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा-विज्ञान के हर क्षेत्र में फ़िज़ियोथेरापी की भूमिका बहुत तेज़ी से बढ़ी है। अब इसकी आवश्यकता अस्थि, नस, पेशी, जोड़, स्नायु आदि से संबंधित रोगों तक ही नहीं, लगभग सभी प्रकार के रोगों में पड़ने लगी है। कई बीमारियों में इसके विना कोई लाभ हो ही नहीं सकता।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सुप्रसिद्ध अस्थि-रोग विशेषज्ञ डॉ शरजिल रशीद ने कहा कि फ़िज़ियोथेरापी बहुत तेज़ी से बढ़ रहा क्षेत्र है। सही ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त फ़िज़ियोथेरापिसट समाज के लिए बहुत उपयोगी होंगे। इसलिए हर विद्यार्थी को अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को बहुत गम्भीरता से लेना चाहिए।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फ़िजियोथेरापिस्ट्स के बिहार के अध्यक्ष डा नरेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि विश्व भर में फ़िज़ियोथेरापी के महत्त्व को समझाने के लिए, वर्ष 1996 से प्रत्येक 8 सितम्बर को ‘विश्व फ़िज़ियोथेरापी दिवस’ मनाया जाता है। इसी दिन 1951 में’वर्ल्ड कंफ़ेडेरेशन औफ़ फ़िज़ियोथेरापिस्ट्स’ की स्थापना हुई थी।
सुप्रसिद्ध फ़िज़ियोथेरापिस्ट डा उदय शंकर प्रसाद, डा जोशनी पाण्डेय तथा अधिवक्ता और संस्थान के छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष अहसास मणिकान्त ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर वरीय फ़िजियोथेरपिस्ट डा मृत्युंजय कुमार, डा पीयूष सिन्हा, डा शहबाज़ खान तथा डा स्नेहा सुमन को ‘फ़िज़ियोथेरापी शिरोमणि” सम्मान से विभूषित किया गया। अतिथियों का स्वागत डा रूपाली भोवाल ने तथा मंच का संचालन वरीय छात्राएँ निहारिका और नेहा वत्स ने किया। धन्यवाद-ज्ञापन डा नवनीत कुमार झा ने किया।
इस अवसर पर, प्रो मधुमाला कुमारी, प्रो चंद्रा आभा, प्रो आदित्य कुमार ओझा, प्रो देवराज कुमार तथा संस्थान के प्रशासी अधिकारी सूबेदार संजय कुमार समेत बड़ी संख्या में सस्थान के शिक्षक, कर्मी एवं छात्रगण उपस्थित थे।
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