पूरा ध्यान भारतीय पुरुष फ्रीस्टाइल दल पर
ध्यान पूरी तरह से भारतीय पुरुष फ्रीस्टाइल (Indian men’s freestyle) दल पर रहेगा, जिनमें से कोई भी अभी तक पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया है। विश्व चैंपियनशिप (Worlds Championship) के रजत पदक विजेता दीपक पुनिया (Deepak Punia) [86 किग्रा] और पूर्व विश्व अंडर-23 चैंपियन अमन सेहरावत (Aman Sehrawat) [57 किग्रा] इस मौके का फायदा उठाने की उम्मीद करेंगे, जबकि मानसी अहलावत (Mansi Ahlawat) और निशा दहिया (Nisha Dahiya) भारतीय महिला दल के लिए 6/6 कोटा हासिल करना चाहेंगी।
अब तक भारत की चार महिला पहलवानों विनेश फोगट (Vinesh Phogat) [50 किग्रा], अंतिम पंघाल (Antim Panghal) [53 किग्रा], अंशु मलिक (Anshu Malik) [57 किग्रा] और रीतिका हुड्डा (Reetika Hooda) [76 किग्रा] ने ओलंपिक कोटा हासिल कर लिया है।
ओलंपिक कोटा जीतने के लिए भारत के पहलवानों को क्या करना होगा?
भारत के पहलवानों के सामने एक चुनौती है और वह है, ओलंपिक कोटा की दौड़ में बने रहने के लिए उन्हें कम से कम सेमीफाइनल तक पहुंचना होगा।
विश्व ओलंपिक खेलों के क्वालीफायर में, प्रत्येक ओलंपिक भार वर्ग में तीन पहलवानों को कोटा दिया जाएगा, जिनमें दो फाइनलिस्ट होंगे और दो सेमीफाइनल मुकाबलों में हारने वालों के बीच प्लेऑफ मुकाबले का विजेता होगा।
वो बड़े नाम हैं, जिनपर निगाहें हैं-
दीपक पुनिया भारतीयों में सबसे बड़ा नाम हैं, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक में भाग लिया था और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। उनके साथ पूर्व विश्व अंडर 23 चैंपियन अमन भी हैं, जिन्होंने ओलंपिक रजत पदक विजेता रवि दहिया को क्वालीफायर में प्रतिस्पर्धा करने के लिए हराया है। सुजीत [65 किग्रा] के प्रदर्शन में भी दिलचस्पी होगी क्योंकि अगर वह कोटा जीतता है, तो इसका मतलब है कि बजरंग पुनिया (Bajrang Puniya) के ओलंपिक में जगह बनाने की संभावनाएँ भी जीवित हो सकती हैं।
क्या कोटा जीतने से पेरिस के लिए टिकट की गारंटी मिलती है?
कुश्ती में, एथलीट द्वारा जीता गया कोटा पहलवान का नहीं बल्कि देश का होता है। इसलिए अंतिम या विनेश द्वारा जीता गया कोटा उनका नहीं बल्कि भारत का होता है। इसी तरह, अगर अमन या दीपक कोटा जीत लेते हैं, तो उन्हें पेरिस ओलंपिक में जाने की गारंटी नहीं है और उन्हें भारतीय कुश्ती महासंघ के विवेक पर अंतिम चयन ट्रायल से गुजरना पड़ सकता है।