हालांकि अमेरिका ने ईरान के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके विमान “दोस्ताना फायर” (फ्रेंडली फायर) की घटना में गलतफहमी के कारण नष्ट हुए, न कि ईरानी हमले में।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के हवाले से सरकारी मीडिया ने कहा कि यह कार्रवाई हालिया इजरायली हमलों और अमेरिकी समर्थन के जवाब में की गई है। उधर इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों को निशाना बनाया है। इजरायली रक्षा बलों के अनुसार, ईरान समर्थित गुटों की ओर से रॉकेट और ड्रोन हमले तेज हुए हैं, जिनका जवाब “कड़े और सटीक प्रहार” से दिया जा रहा है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्वीकार किया है कि क्षेत्र में उसके कुछ सैन्य अड्डों पर हमले हुए, लेकिन अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया। पेंटागन का कहना है कि चार विमानों की क्षति की जांच जारी है और प्रारंभिक संकेत ‘ऑपरेशनल कंफ्यूजन’ की ओर इशारा करते हैं। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने सहयोगी इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करेगा।
इस बीच खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उथल-पुथल देखी जा रही है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव सीधे अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक युद्ध में बदलता है तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा। फिलहाल तीनों पक्षों—ईरान, इजरायल और अमेरिका—की ओर से आक्रामक बयानबाजी जारी है और हालात अत्यंत तनावपूर्ण बने हुए हैं।
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