जदयू ने तीन बाहुबलियों को भी टिकट दिया है। अनंत सिंह मोकामा, धुमल सिंह एकमा से और अमरेंद्र पांडेय को कुचायकोट से टिकट मिला है। तीनों पर अपराध के कई मामले दर्ज हैं। कुछ सीटें ऐसी हैं जो चिराग पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी की सीट मानी जा रही थी वहां से भी जदयू ने उम्मीदवार उतार दिए हैं।
सूची में राजगीर से कौशल किशोर, हिलसा से कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा और बाराचट्टी से ज्योति देवी जैसे नाम प्रमुख हैं। पार्टी ने कई ऐसी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जहाँ पहले सहयोगी दलों या विरोधी गुटों का प्रभाव रहा है। इसे नीतीश कुमार की “राजनीतिक पुनर्संतुलन” की रणनीति माना जा रहा है।
इस सूची में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार का नाम नहीं है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि जदयू ने इस बार जातीय समीकरणों में पिछड़ा, अति पिछड़ा और महिला वर्ग पर विशेष ध्यान दिया है, जबकि मुस्लिम प्रतिनिधित्व को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया है।
नीतीश कुमार ने टिकट बंटवारे में कई पुराने नेताओं की जगह नए चेहरों को प्राथमिकता दी है। चार मौजूदा विधायकों को सूची से बाहर कर दिया गया है। यह कदम पार्टी के भीतर “नई ऊर्जा और नई सोच” को आगे लाने की दिशा में देखा जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों का चयन जातीय, भौगोलिक और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखकर किया गया है। यह भी माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने विपक्षी खेमे और सहयोगी दलों दोनों को संदेश दिया है कि जदयू अपनी राजनीतिक ज़मीन पर मज़बूती से डटी है और समझौतों की बजाय अपने दम पर जनाधार बढ़ाने की रणनीति अपना रही है।
सूत्र बताते हैं कि दूसरी सूची पर काम जारी है और जल्द ही शेष सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की जाएगी। पहली सूची ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जदयू इस बार चुनावी मैदान में नए उत्साह और बदले राजनीतिक समीकरणों के साथ उतरने जा रही है।
देखें जदयू ने किसे कहां से टिकट मिला :-





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