झारखंड मुक्ति मोर्चा से सीता सोरेन निष्कासित : झारखंड में लोकसभा चुनाव के बीच राज्य के सबसे बड़े सियासी घराने में घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा. शिबू सोरेन (Shibu Soren) परिवार की सबसे बड़ी बहू सीता सोरेन को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।
पार्टी में अलग थलग पड़ गईं थीं सीता सोरेन : झारखंड में तीन बार की विधायक सीता सोरेन 2009 में अपने पति दुर्गा सोरेन की मौत के बाद से पार्टी में अलग-थलग पड़ गई थीं। दुर्गा सोरेन शिबू सोरेन के बड़े बेटे थे. साल 2009 में बोकारो में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी। दुर्गा सोरेन की मौत के बाद सीता सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा से पहली बार विधायक बनीं लेकिन, पार्टी में उन्हें वो अहमियत नहीं मिली जो हेमंत सोरेन को मिली। गुरु जी के बाद पार्टी पर हेमंत सोरेन ने पूरी तरह से पकड़ बना ली और वे झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री भी बने।
दिल्ली में बीजेपी में शामिल हुई सीता सोरेन : जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद सीता सोरेन को लगा कि पार्टी की कमान अब उनके हाथ में होगी। शिबू सोरेन उन्हें मुख्यमंत्री बनाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हेमंत के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी कल्पना सोरेन (Kalpana Soren) ने पार्टी पर कब्जा कर लिया। सीता सोरेन के विरोध की वजह से कल्पाना सोरेन मुख्यमंत्री नहीं बना पाईं। पार्टी में अपने अस्तित्व को खत्म होते देख सीता सोरेन 20 मार्च 2024 को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) में शामिल होते ही सीता सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा पर उपेक्षा का आरोप लगाया और कहा कि उनके पति की मौत की जांच नहीं हुई, उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ सरकार से भी न्याय नहीं मिला।
बीजेपी ने सीता सोरेन को दुमका से बनाया उम्मीदवार : संताल परगना की दुमका लोकसभा सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ है। यहां से शिबू सोरेन कई बार सांसद चुने गए हैं. हेमंत सोरेन भी दुमका से सांसद रहे हैं, एक बार बाबूलाल मरांडी भी यहां से सांसद रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के इस अपराजेय गढ़ को भेदने के लिए सीता सोरेन को अपना उम्मीदवार बनाया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा से इस्तीफा दे चुकी हैं सीता सोरेन : भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा की मौजूदा विधायक सीता सोरेन ने विधायक के साथ ही पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया था। बीजेपी में शामिल होने के करीब दो महीने बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सीता सोरेन पर एक्शन लिया और उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया।
सीता सोरेन ने JMM पर किया पटलवार : पार्टी से निकाले जाने पर सीता सोरेन ने कहा कि वह पहले ही झामुमो को अपना इस्तीफा सौंप चुकी हैं और अब उनका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें झामुमो से कोई उम्मीद नहीं है। वह मेरे परिवार का सम्मान करने में विफल रही है। उन्होंने उनके दिवंगत पति को भी याद नहीं किया है।