महाराष्ट्र निकाय चुनाव: बीजेपी की प्रचंड जीत, बीएमसी में ठाकरे परिवार का 3 दशक का वर्चस्व खत्म

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की शहरी राजनीति की तस्वीर बदल दी है। ताज़ा परिणामों और रुझानों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में बड़ी जीत दर्ज की है। सबसे अहम यह कि मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर ठाकरे परिवार का लगभग 30 साल पुराना वर्चस्व समाप्त हो गया है, और पहली बार यहां बीजेपी की निर्णायक पकड़ बनती दिख रही है।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: January 16, 2026 10:38 pm

महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में से अधिकांश में बीजेपी या महायुति गठबंधन बहुमत के आंकड़े को पार करता नजर आ रहा है। मुंबई के अलावा पुणे, नागपुर, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़, ठाणे और औरंगाबाद (छत्रपति संभाजी नगर) जैसे प्रमुख शहरी निकायों में भी बीजेपी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। कई नगर निगमों में बीजेपी अकेले सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि शिंदे शिवसेना ने गठबंधन को बहुमत तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

बीएमसी चुनाव के नतीजे इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना माने जा रहे हैं। 227 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है। ताजा आंकड़ों के अनुसार महायुति गठबंधन इस आंकड़े के पार पहुंच चुका है। 1990 के दशक के मध्य से बीएमसी पर काबिज रही शिवसेना (अब उद्धव ठाकरे गुट) इस बार पिछड़ गई है। यही वजह है कि इसे ठाकरे परिवार के राजनीतिक प्रभाव को लगा अब तक का सबसे बड़ा शहरी झटका माना जा रहा है।

राज्यभर में देखें तो बीजेपी ने हजार से अधिक वार्डों में बढ़त या जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (उद्धव गुट) का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। कई शहरों में कांग्रेस और एनसीपी सिमटती नजर आईं, वहीं एमएनएस भी कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक ही प्रभाव दिखा सकी।

चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक शहरी मतदाताओं ने विकास, बुनियादी सुविधाओं और डबल इंजन सरकार के तर्क को तरजीह दी, जिसका सीधा लाभ बीजेपी और उसके सहयोगियों को मिला। महिलाओं और युवा मतदाताओं में भी महायुति के पक्ष में रुझान देखने को मिला है।

परिणाम सामने आने के बाद बीजेपी नेतृत्व ने इसे जनता के भरोसे की जीत बताया और कहा कि शहरी निकायों में यह जनादेश बेहतर प्रशासन और पारदर्शिता की उम्मीद का संकेत है। वहीं विपक्षी दलों ने नतीजों पर निराशा जताते हुए आत्ममंथन की बात कही है।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव 2026 राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ बनकर उभरे हैं। बीएमसी समेत प्रमुख शहरी निकायों में बीजेपी की मजबूत पकड़ ने न सिर्फ स्थानीय सत्ता संतुलन बदला है, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी नए राजनीतिक संकेत दे दिए हैं।

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