इमरजेंसी को लेकर कांग्रेस को लगातार घेर रही सरकार
18वीं लोकसभा शुरू होते ही प्रधानमंत्री ने आपातकाल की चर्चा कर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ( Sonia Gandhi ) की दुखती रग पर हाथ रख दिया. पीएम मोदी ( PM Modi ) ने इमरजेंसी को लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया. उन्होंने कहा कि देश ने देखा है कि किस तरह पूरे देश को जेलखाना बना दिया गया. देश की नई पीढ़ी को यह जनाना आवश्यक है 25 जून 1975 को हमारे देश में तत्कालीन सरकार ने कैसे इमरजेंसी ( Emergency ) थोप दिया था.
आपातकाल (Emergency) पर लोकसभा में निंदा प्रस्ताव
25 जून 1975 को लगे आपातकाल (Emergency) के 50 साल पूरे होने पर लोकसभा में निंदा प्रस्ताव लाया गया. लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) की तरफ से इमरजेंसी (Emergency) पर निंदा प्रस्ताव पढ़ा गया. स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) के प्रस्ताव का जहां कांग्रेस (Congress) के नेताओं ने विरोध किया, वहीं बीजेपी ने इसका स्वागत किया.
राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी आपातकाल का जिक्र
संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभभिषाण में आपातकाल (Emergency) का पूरा जिक्र था. राष्ट्रपति द्वारा अपने भाषण में आपातकाल की चर्चा करते ही कांग्रेस ने सदन में जमकर हंगामा किया.
सोनिया गांधी ने दिया पीएम मोदी को जवाब
पीएम मोदी के आपातकाल (Emergency) के जिक्र के बाद देश में राजनीतिक भूचाल आ गया. संसद में भी यह मुद्दा खूब गरम है. इस बीच अब कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ( Sonia Gandhi ) ने एक लेख लिखकर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है.
सोनिया गांधी ने अंग्रेजी अखबार में लिखा लेख
अंग्रेजी अखबार द हिंदू में सोनिया गांधी ( Sonia Gandhi ) ने अपने लेख में कहा कि 2024 के चुनाव में पीएम की व्यक्तिगत, राजनीतिक और नैतिक हार हुई है. खुद को ईश्वरीय शक्ति घोषित करने वाले पीएम मोदी (PM Modi) के लिए ये चुनाव परिणाम उनकी घृणा की राजनीति का अस्वीकरण था. पीएम मोदी सहमति की बात करते हैं लेकिन टकराव का रास्ता अख्तियार करते हैं.
सोनिया ने इमरजेंसी का दिया जवाब
सोनिया गांधी ( Sonia Gandhi ) ने लेख में आगे लिखा है सरकार की तरफ से जब हमसे स्पीकर चुनाव में समर्थन की मांग की गई तो हमने कहा कि परंपरा के मुताबिक उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को मिलना चाहिए, लेकिन सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी. बल्कि प्रधानमंत्री ने इमरजेंसी (Emergency) का जिक्र किया और आश्चर्यजनक रूप से स्पीकर ने भी ध्यान भटकने के लिए वही किया. मार्च 1977 में देश के लोगों ने इमरजेंसी (Emergency) लगाए जाने पर अपना फैसला सुनाया जिसे स्वीकार किया गया था.
NEET पर सरकार को खरी-खरी सुनाया
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ने लेख में आगे लिखा कि NEET घोटाले पर, जिसने हमारे लाखों युवाओं के जीवन पर कहर बरपाया है, शिक्षा मंत्री की तत्काल प्रतिक्रिया यह थी कि जो कुछ हुआ है, उसकी गंभीरता को नकार दिया जाए. प्रधानमंत्री मोदी जो अपनी ‘परीक्षा पे चर्चा’ करते हैं, वे देश भर में इतने सारे परिवारों को तबाह करने वाले लीक पर स्पष्ट रूप से चुप हैं.
सोनिया ने बुलडोजर एक्शन पर भी घेरा
अपने लेख में सोनिया गांधी ने बीजेपी शासित राज्यों में बुलडोजर एक्शन (Bulldozer Action in BJP Ruled Statas) को लेकर भी पीएम मोदी को घेरा. उन्होंने लिखा कि देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और धमकी का अभियान एक बार फिर तेज हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्यों में, बुलडोजर फिर से अल्पसंख्यकों के घरों को महज आरोपों के आधार पर ध्वस्त कर रही है. उचित प्रक्रिया का उल्लंघन हो रहा है और सामूहिक दंड दिया जा रहा है.
प्रधानमंत्री को आत्म विश्लेषण करना चाहिए : सोनिया
सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने लेख में आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने चुनाव के दौरान अपने पद की मर्यादा का ख्याल न रखते हुए झूठ बोला और सांप्रदायिक बातें कहीं. मणिपुर जलता रहा लेकिन प्रधानमंत्री वहां जाने का समय नहीं निकाल पाए. प्रधानमंत्री के 400 पार के नारे को जनता ने रिजेक्ट किया इस पर उनको आत्म विश्लेषण करना चाहिए.
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