मुंबई लोकल ट्रेन सीरियल ब्लास्ट मामले में महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर 24 जुलाई को सुनवाई होनी है। वर्ष 2006 में हुए इन धमाकों में 180 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे। इस मामले में हाईकोर्ट की दो जजों की पीठ ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों को गुनहगार साबित करने में असफल रहा। कोर्ट के सामने रखे गए गवाहों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न है। आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS), जो इस मामले की जांच कर रहा है, धमाकों में इस्तेमाल हुए बम को रिकॉर्ड पर पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने माना कि पुलिस ने आरोपियों को टॉर्चर करके उनसे जबरदस्ती जुर्म कबूल करवाया।
उल्लेखनीय है कि शुरुआती जांच में 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था लेकिन बाद में 1 को रिहा कर दिया। मकोका की विशेष अदालत ने 2015 में अपना फैसला सुनाया और 12 आरोपियों में से 5 को फांसी और 7 को आजीवन कारावास की सजा हुई। फिर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार महाराष्ट्र सरकार हाईकोर्ट के पास इस सजा की पुष्टि के लिए गई ताकि फांसी की सजा को अमल में लाया जा सके। इस दौरान सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपनी सजा को चुनौती दी।
इस केस की सुनवाई जनवरी 2019 में उच्च न्यायालय पहुंची। कई जजों के संन्यास और बाकी वजहों से यह केस लटकता रहा और आखिरकार पिछले साल जुलाई में सुनवाई आरंभ हुई। जस्टिस अनिल किलोर की विशेष बेंच का गठन हुआ जिसने 70 से अधिक सुनवाइयों के बाद 31 जनवरी को फैसला सुरक्षित किया और सोमवार को सुनाया और सभी आरोपियों को बरी किया।
इस फैसले से आम जनता में आक्रोश है। ट्रेन ब्लास्ट में पीडित परिवार और उनके प्रियजन न्याय चाहते हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही थी। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है जिसे कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
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