केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने NEET UG नीट यूजी 2024 पेपर लीक मामले में 21 और आरोपियों के खिलाफ 5 अक्टूबर 2024 को पटना स्थित विशेष सीबीआई अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट के साथ, इस मामले में अब तक कुल 40 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
इससे पहले 20 सितंबर को सीबीआई ने इस मामले में 6 आरोपियों के खिलाफ दूसरी चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि 1 अगस्त 2024 को 13 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की गई थी।
मामले की जांच और आरोपियों की पहचान
NEET UG नीट यूजी 2024 पेपर लीक: सीबीआई द्वारा की गई जांच में पंकज कुमार उर्फ आदित्य, जो बोकारो निवासी और एक सिविल इंजीनियर है, को इस पेपर लीक के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में पहचाना गया है। पंकज ने झारखंड के हजारीबाग स्थित राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के ट्रंक से प्रश्नपत्र चुराने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इस अपराध में उसका सहयोगी राजू सिंह भी शामिल था। दोनों को 16 जुलाई 2024 को हजारीबाग के कटकमदाग थाना क्षेत्र के रामनगर इलाके के राज गेस्ट हाउस से गिरफ्तार किया गया था।
मामले की शुरुआत और पेपर लीक की साजिश
सीबीआई ने यह मामला 23 जून 2024 को अपने हाथ में लिया, जब उसने 5 मई 2024 को शास्त्रीनगर थाना, पटना में दर्ज एफआईआर संख्या 358/2024 को आगे बढ़ाते हुए जांच शुरू की। एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 407, 408, 409 और 120 (बी) के तहत दर्ज की गई थी।
जांच में खुलासा हुआ कि 5 मई 2024 की सुबह हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल में एनटीए द्वारा भेजे गए ट्रंक में रखे नीट यूजी 2024 के प्रश्नपत्रों को वहां के एनटीए सिटी कोऑर्डिनेटर और स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. अहसानुल हक और अन्य साथियों की मिलीभगत से चुराया गया।
दूसरी चार्जशीट के प्रमुख आरोपी
20 सितंबर को दाखिल की गई दूसरी चार्जशीट में जिन छह आरोपियों का नाम सामने आया, उनमें बलदेव कुमार उर्फ चिंटू, सनी कुमार, डॉ. अहसानुल हक (ओएसिस स्कूल, हजारीबाग के प्रिंसिपल और एनटीए सिटी कोऑर्डिनेटर), मोहम्मद इम्तियाज आलम (ओएसिस स्कूल के वाइस प्रिंसिपल और टेस्ट सेंटर सुपरिटेंडेंट), जमालुद्दीन उर्फ जमाल (हिंदी अखबार के पत्रकार), और अमन कुमार सिंह शामिल थे।
चोरी की प्रक्रिया का खुलासा
जांच के अनुसार, 5 मई 2024 को एनटीए के ट्रंक ओएसिस स्कूल में लाए गए और इन्हें स्कूल के कंट्रोल रूम में रखा गया। ट्रंक के आने के कुछ ही मिनटों बाद, प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल ने अवैध रूप से पंकज कुमार और उसके साथियों को कंट्रोल रूम तक पहुंचने की अनुमति दी। अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर ट्रंक को खोला गया और प्रश्नपत्रों को निकाल लिया गया। इन उपकरणों को भी सीबीआई ने जब्त कर लिया है।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि प्रिंसिपल डॉ. अहसानुल हक, जो एनटीए के सिटी कोऑर्डिनेटर भी थे, और वाइस प्रिंसिपल मोहम्मद इम्तियाज आलम ने मिलकर इस पेपर लीक की साजिश रची। इस षड्यंत्र में उनके साथ अन्य स्थानीय सहयोगी भी शामिल थे।
सीबीआई की इस जांच में अब तक कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं, और भविष्य में इस मामले से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
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