दूसरी ओर राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देते हुए सरकार की नीतियों और अर्थव्यवस्था की दिशा पर विस्तार से बात की। संबोधन के दौरान विपक्षी दलों के विरोध और वॉकआउट की स्थिति भी बनी। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की वृद्धि दर ऊंची है और यह “हाई ग्रोथ और लो इन्फ्लेशन” का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
उन्होंने देश की आर्थिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत कभी छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, बाद में 11वें स्थान पर पहुंचा और अब तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है। भाषण में उन्होंने जनसांख्यिकीय लाभ का हवाला देते हुए कहा कि विकसित देशों की आबादी वृद्ध हो रही है जबकि भारत की युवा आबादी विकास की ताकत है।
सरकार की नीतियों को “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म” दृष्टिकोण से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि सुधारों ने दीर्घकालिक विकास के प्रति भरोसा बढ़ाया है। बैंकिंग क्षेत्र में बदलाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों को घटाकर 1% से नीचे लाया गया है और इससे ऋण क्षमता मजबूत हुई है। उन्होंने सार्वजनिक उपक्रमों की वित्तीय स्थिति में सुधार और व्यापार समझौतों को वैश्विक भरोसा बढ़ाने वाला बताया।
दिन भर चले घटनाक्रम में संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई, लेकिन धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के साथ प्रक्रिया पूरी हुई। पूरे घटनाक्रम ने बजट सत्र के दौरान जारी राजनीतिक टकराव और आर्थिक नीति-बहस दोनों को एक साथ केंद्र में ला दिया।
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