कलाधर मंडल सातवें राउंड तक आगे चल रहे थे लेकिन उसके बाद पिछड़ने लगे। निर्दलीय शंकर सिंह नौवें राउंड की गिनती में 4239 वोट से आगे थे। इसी तरह 10 में राउंड की गिनती में वह 5069 और 11 में राउंड की गिनती में वह 6838 वोटो से आगे चल रहे थे। राजद की बीमा भारत-रूस से ही पीछे चल रहीं थीं।
सातवें राउंड के बाद बदली तस्वीर
सातवें राउंड तक की गिनती अब पूरी होने के बाद नतीजा भी बदलने लगा। निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह अब जदयू के कलाधर मंडल से 1036 मतों से आगे हो गए हैं। सातवें राउंड तक की गिनती में निर्दलीय शंकर सिंह को कुल 37137 वोट मिले हैं जबकि कलाधर मंडल को 36101 मत मिले हैं। राजद की बीमा भारती को सातवें राउंड तक कुल 20053 मत मिले हैं। राजद की बीमा भारती यहां पहले भी पीछे चल रहीं थीं।
छठवें राउंड में कलाधर आगे
छठवें राउंड की गिनती में जदयू के कलाधर मंडल निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह से 501 मतों से आगे चल रहे थे। कलाधर मंडल जो कि जदयू के प्रत्याशी हैं उनको 32209 वोट मिले हैं। शंकर सिंह जो निर्दलीय प्रत्याशी हैं उनको 31705 वोट मिले हैं । राजद की बीमा भारती को छठे राउंड तक 16991 वोट मिले हैं। इससे पूर्व पांचवें राउंड में भी जदयू के कलाधर मंडल निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह से 1757 मतों से आगे थे।
सत्तारूढ दल के साथ विपक्ष भी हारा
सत्तारूढ़ दल के साथ विपक्ष भी रुपौली विधानसभा के उप चुनाव में हार गया है। इस सीट को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिष्ठा की सीट बना दी थी। दोनों ओर से धुआंधार प्रचार हुआ था। हालांकि इस प्रचार का कोई नतीजा सामने नहीं आया । राजद को यह चुनाव बड़ा झटका दिया है। तेजस्वी यादव यहां पर प्रचार करने गए थे लेकिन इसका जनता पर असर दिखाई नहीं दिया है। दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह की जीत ने सबको चौंका दिया है। कहा जा रहा है कि अंदरखाने से इन्हें पीके यानि प्रशांत किशोर और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का भी मौन समर्थन मिला था।
लेसी सिंह की जी तोड़ मेहनत काम न आई
जदयू की मंत्री लेशी सिंह इस चुनाव में बहुत मेहनत कीं। हालांकि वे अपनी पार्टी के प्रत्याशी कलाधर मंडल को जीत नहीं दिला सकीं। लेशी सिंह के लिए भी यह प्रतिष्ठा की सीट थी। दरअसल बीमा भारती से उनकी नहीं बनती है। पूर्व में बीमा भारती भी जदयू में थीं लेकिन जब मंत्री बनाना हुआ तो पार्टी ने लेसी सिंह को मौका दिया। इसी वजह से बीमा भारती नाराज थीं। और यह नाराजगी उसे समय साफ दिखाई दी जब वह जदयू को छोड़कर राजद में चली गईं। लेशी सिंह बीमा भारती को हराने के लिए रुपौली में कैंप कर रही थीं। वे राजपूत मतदाताओं को जदयू से जोड़ने की भरपूर कोशिश कीं हालांकि वह सफल दिखाई नहीं दे रही है। राजपूतों का अधिकांश मत निर्दलीय शंकर सिंह को जाता दिखाई दे रहा है।
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