शाहरूख खान के तीन दशक लंबे फिल्मी सफर में यह पहला अवसर है जब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर यह सर्वोच्च सम्मान मिला है। पुरस्कार ग्रहण करते समय उन्होंने मंच से ‘आदाब’ और ‘नमस्ते’ कहकर दर्शकों का अभिवादन किया।
इसे शाहरूख के करियर का “लंबा इंतजार पूरा होने” वाला पल बताया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि शाहरूख, रानी मुखर्जी और विक्रांत मेस्सी—तीनों ने पहली बार यह सम्मान हासिल किया।
अन्य विजेता
इस बार रानी मुखर्जी को ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे ’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का खिताब ‘12th Fail’ को और सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का सम्मान ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ को दिया गया। निर्देशक सुदीप्तो सेन को ‘The Kerala Story’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार मिला, जबकि ‘सैम बहादुर’ को राष्ट्रीय और सामाजिक मूल्यों को बढ़ाने वाली सर्वश्रेष्ठ फिल्म चुना गया।
सहायक भूमिकाओं में विजयाराघवन (‘Pookkaalam’) और एम. एस. भास्कर (‘पार्किंग’) को श्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला, जबकि उर्वशी (‘Ullozhukku’) और जानकी बोदिवाला (‘Vash’) ने श्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का सम्मान जीता। पार्श्व गायन श्रेणी में ‘जवान’ के गीत “चलेया” के लिए शिल्पा राव सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका बनीं और तेलुगु फिल्म ‘Baby’ के लिए पी. वी. एन. एस. रोहित सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक घोषित हुए।
तकनीकी श्रेणियों में ‘एनिमल’ को श्रेष्ठ साउंड डिज़ाइन, ‘2018’ को श्रेष्ठ प्रोडक्शन डिज़ाइन और ‘सिर्फ एक बंदा काफी है ’ को श्रेष्ठ संवाद का पुरस्कार मिला।
महत्त्व
समीक्षकों का कहना है कि इस बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने न केवल लोकप्रिय सिनेमा बल्कि प्रयोगधर्मी और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों को भी सम्मानित किया है। शाहरूख खान का सम्मान इस आयोजन को ऐतिहासिक बना देता है और उनके अभिनय को एक नई आधिकारिक पहचान देता है।
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