मंदिर-मस्जिद विवाद स्वीकार्य नहीं: मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंदिर-मस्जिद विवादों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे मुद्दे उठाकर हिंदू नेताओं का दावा करना स्वीकार्य नहीं।

मोहन भागवत (File Photo)
Written By : MD TANZEEM EQBAL | Updated on: December 20, 2024 6:42 pm

पुणे: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने देश में मंदिर-मस्जिद विवादों के बढ़ते मुद्दों पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोग खुद को “हिंदुओं का नेता” बनाने के लिए इस तरह के विवाद खड़े कर रहे हैं, जो किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।

पुणे में गुरुवार को ‘भारत – विश्वगुरु’ विषय पर व्याख्यान देते हुए भागवत ने कहा, राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोगों को यह भ्रम हो गया है कि वे इसी तरह के विवाद उठाकर हिंदुओं के नेता बन सकते हैं। यह तरीका गलत है। हम लंबे समय से सौहार्द में रहते आए हैं, हमें दुनिया को दिखाना होगा कि भारत में लोग एक साथ मिलकर रह सकते हैं।

मंदिर-मस्जिद विवादों पर तीखी प्रतिक्रिया

भागवत ने बिना किसी विशेष स्थान का जिक्र किए कहा, हर दिन एक नया विवाद खड़ा किया जा रहा है। यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है? हमें यह दिखाना होगा कि भारत में लोग एकता के साथ रहते हैं।

आरएसएस प्रमुख के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब हाल के दिनों में मस्जिदों की जांच के लिए अदालतों में याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं। इन याचिकाओं में दावा किया जा रहा है कि मस्जिदों के नीचे मंदिरों के अवशेष हैं।

हाल ही में 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में किसी भी नए सर्वे या विवाद की याचिका पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

संविधान के अनुसार चलता है देश

अपने व्याख्यान में मोहन भागवत ने कहा कि देश अब संविधान के अनुसार चलता है। उन्होंने कहा, अब देश में संविधान का शासन है। यहां लोग अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं, जो सरकार चलाते हैं। अब वर्चस्व के दिन खत्म हो चुके हैं।

भागवत ने मुगल शासन का जिक्र करते हुए कहा कि औरंगजेब का शासन कट्टरता से भरा हुआ था। हालांकि, उनके वंशज बहादुर शाह जफर ने 1857 में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाया था।

अलगाववाद की जड़ें ब्रिटिश काल से

भागवत ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर हिंदुओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए था, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत ने इस मुद्दे को साम्प्रदायिक रंग दे दिया। ब्रिटिश शासकों ने राम मंदिर के मुद्दे को भांपकर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच फूट डाल दी, जिसके चलते अलगाववाद की भावना पैदा हुई और पाकिस्तान का निर्माण हुआ।

सभी को समानता और सौहार्द का संदेश

मोहन भागवत ने सवाल किया कि जब सभी भारतीय हैं तो वर्चस्व की भाषा क्यों बोली जा रही है। उन्होंने कहा, यहां कौन अल्पसंख्यक है और कौन बहुसंख्यक? सभी समान हैं। इस देश की परंपरा है कि हर कोई अपनी-अपनी पूजा पद्धति का पालन कर सकता है। बस, जरूरत है कि हम कानूनों का पालन करें और सौहार्द में रहें।”

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One thought on “मंदिर-मस्जिद विवाद स्वीकार्य नहीं: मोहन भागवत

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