भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने वक्फ संशोधन विधेयक पर तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का समर्थन हासिल कर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दिया है। पारंपरिक रूप से, ये दोनों दल मुस्लिम समुदाय के एक महत्वपूर्ण समर्थन आधार पर निर्भर रहे हैं और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दों पर बीजेपी से अलग रुख अपनाते रहे हैं। ऐसे में इन दलों द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करना एक राजनीतिक रणनीति का स्पष्ट संकेत देता है।
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने इस विधेयक पर सहयोगी दलों का समर्थन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर बैकचैनल वार्ताएं कीं। इन वार्ताओं के तहत टीडीपी और जेडीयू नेतृत्व को यह भरोसा दिलाया गया कि यह विधेयक मुस्लिम समाज के हितों की रक्षा करेगा और उनके अधिकारों को सुरक्षित रखेगा।
गठबंधन सहयोगियों को साधने की रणनीति
विधेयक पेश करने से पहले, बीजेपी के वरिष्ठ मंत्रियों ने टीडीपी और जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व को इसके उद्देश्यों और प्रभावों के बारे में अवगत कराया। यही नहीं, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) जैसे अन्य सहयोगी दलों से भी परामर्श किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने अपने सहयोगियों को यह समझाने में सफलता प्राप्त की कि यह विधेयक न केवल मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि वंचित समुदायों के हितों को भी ध्यान में रखेगा। हालांकि, प्रारंभिक दौर में टीडीपी और जेडीयू ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई।
संशोधनों के बाद बढ़ा समर्थन
सहयोगियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को विधेयक भेजा, जहां 14 महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकार किया गया, जिनमें जेडीयू और टीडीपी के सुझाव प्रमुख थे।
इन संशोधनों को शामिल करने के बाद मंत्रिमंडल ने विधेयक को अंतिम मंजूरी दी, जिससे सहयोगी दलों का समर्थन सुनिश्चित किया जा सका।
राजनीतिक समीकरण और आगामी चुनाव
इस विधेयक के समर्थन को लेकर बिहार और आंध्र प्रदेश की राजनीति में आगामी चुनावों के संदर्भ में गहरी रणनीतिक सोच देखी गई।
इसके अलावा, एलजेपी, आरएलडी, हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) जैसे अन्य गठबंधन सहयोगी दलों ने भी इस विधेयक को समर्थन दिया।
बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति
बीजेपी की यह रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गठबंधन प्रबंधन की कुशलता को दर्शाती है। पार्टी ने अपने दूसरे कार्यकाल से तीसरे कार्यकाल तक सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखने की अपनी नीति को जारी रखा है।
इस विधेयक पर सहयोगी दलों का समर्थन हासिल करना बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता मानी जा रही है। इससे न केवल बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन की एकता मजबूत हुई है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है कि पार्टी अपने सहयोगियों के हितों को लेकर गंभीर है।
बीजेपी द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक पर जेडीयू और टीडीपी का समर्थन प्राप्त करना महज संख्यात्मक बहुमत हासिल करने की कवायद नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। पार्टी ने सहयोगी दलों की चिंताओं को दूर करने के लिए आवश्यक संशोधन किए, जिससे सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान निकाला जा सका।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि बीजेपी न केवल विधायी मुद्दों पर अपने गठबंधन सहयोगियों को साथ लेकर चल रही है, बल्कि राजनीतिक रूप से जटिल मुद्दों पर भी व्यापक सहमति बनाने में सक्षम है। उल्लेखनीय है कि बुधवार- गुरुवार की दरमियानी रात 2 बजे लोकसभा में हुई वोटिंग में वक्फ संशोधन विधेयक के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े और लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा के बाद ये विधेयक आसानी से पास हो गया। खबर लिखे जाने तक राज्यसभा में इस पर चर्चा जारी है।
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