पटना के राजभवन में हुआ रामनंदन मिश्र ग्रंथावली का लोकार्पण समारोह

लोक भवन, पटना में एक गरिमामय एवं विचारोत्तेजक समारोह में इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) नई दिल्ली द्वारा किताबवाले के सहयोग से संयुक्त रूप से प्रकाशित पांच खंडों में विभाजित रामनंदन मिश्र ग्रंथावली का औपचारिक लोकार्पण संपन्न हुआ। कार्यक्रम में 400 से अधिक प्रतिभागियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिनमें साहित्य, इतिहास, सामाजिक विज्ञान तथा सार्वजनिक जीवन से जुड़े विद्वान, शोधार्थी, शिक्षाविद् एवं प्रबुद्ध नागरिक सम्मिलित थे।

Written By : डेस्क | Updated on: February 19, 2026 10:11 pm

समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के माननीय राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान ने अपने संबोधन में कहा कि राम नंदन मिश्र का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वैचारिक ऊंचाइयों और नैतिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मूल्यों की पुनर्स्थापना के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनके विचार विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने की। अपने विस्तृत अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने रामनंदन मिश्र के बहुआयामी व्यक्तित्व के प्रत्येक पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके सामाजिक सरोकारों, स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय राजनीतिक भूमिका, समाजवादी वैचारिकी के प्रति प्रतिबद्धता तथा आध्यात्मिक साधना के आयामों को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण के साथ उनके घनिष्ठ सम्बंधों तथा स्वतंत्रता संग्राम के अन्य अग्रणी नेताओं के साथ उनके वैचारिक संवाद का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि रामनंदन मिश्र केवल एक स्वतंत्रता सेनानी या समाजवादी चिंतक ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय बौद्धिक परम्परा के ऐसे प्रतिनिधि थे, जिनकी लेखनी आज भी प्रासंगिक है। उनके अनेक लेख और विचार समकालीन सामाजिक-राजनीतिक विमर्श में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। श्री राय ने यह भी कहा कि इस विशिष्ट प्रकाशन को संभव बनाने में संपादक रामचंद्र प्रधान, डॉ. सुरेंद्र कुमार तथा प्रो. (डॉ.) रमेश चन्द्र गौड़, डीन, आईजीएनसीए के उल्लेखनीय योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके समर्पित प्रयासों से यह ग्रंथावली शोधपरक, प्रामाणिक और सुव्यवस्थित रूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत हो सकी है।

विशिष्ट अतिथि नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि यह ग्रंथावली स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक विविधता तथा समाजवादी चिंतन को समझने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। प्रो. आईजीएनसीए के डीन एवं कलानिधि विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमेश चन्द्र गौड़ ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि यह संयुक्त प्रकाशन राष्ट्रीय वैचारिक विरासत के संरक्षण एवं पुनर्पाठ की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि पाँचों खंडों में रामनंदन मिश्र के जीवन-संघर्ष, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका, समाजवादी प्रतिबद्धता तथा आध्यात्मिक साधना के विविध आयामों को समग्रता से प्रस्तुत किया गया है।

उल्लेखनीय है कि यह ग्रंथावली स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी चिंतक एवं आध्यात्मिक साधक राम नंदन मिश्रा (1906–1989) के जीवन और कृतित्व का प्रामाणिक संकलन है। इसमें उनके संस्मरण, वैचारिक लेख, गांधीवादी दृष्टिकोण, समकालीन सामाजिक-राजनीतिक प्रश्नों पर विचार तथा आध्यात्मिक विमर्श को सुव्यवस्थित रूप में संकलित किया गया है।

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