Bangladesh से सोमवार की शाम जैसे ही यह सूचना आई कि शेख हसीना (Sheikh Hasina) का विमान भारत के हिंडन हवाई अड्डे पर उतरा है और उनके विमान को भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान एस्कॉर्ट कर ले गए,वहां भारत और हिंदू विरोधी हिंसा शुरू हो गई।
हिंसा आसपास के जिलों में फैली
हिंसा ढाका के साथ ही आसपास के जिलों में भी फैल गई है। सब जगह अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं। मंदिरों में आगजनी की जा रही है। अनेक इस्कॉन मंदिरों को जला कर राख कर दिया गया। कई लोगों की हत्या कर दी गई। जो लोग अपने राष्ट्रपिता बंग बंधु शेख मुजीब की स्मृतियों का अपमान कर सकते हैं,उनसे कुछ अधिक की उम्मीद नहीं की जा सकती। वहां हिंदू अब और असुरक्षित हो जाएंगे। हो सकता है कि बडे पैमाने पर उनका पलायन भारत की ओर हो। भाजपा नेता शिवेदु अधिकारी का तो कहना है कि बांग्लादेश से जुड़े जिलों में बड़े पैमाने पर वहां से हिंदू आ सकते हैं। यह एक नई समस्या होगी।
शेख हसीना को पूरी सुरक्षा
शेख हसीना(Sheikh Hasina’s) ने ब्रिटेन से राजनीतिक शरण मांगी थी लेकिन वह अभी तक निर्णय नहीं कर सका है। जब तक उन्हें वहां से कोई सूचना नहीं मिलती,वह भारत में ही रहेंगी। विदेश मंत्री ने उन्हें पूरी सुरक्षा देने का आश्वासन दिया है। लेकिन अभी तक यह नहीं बताया गया है कि उन्हें कहां रखा गया है। विदेश मंत्री ने सुबह सर्वदलीय बैठक में और बाद में राज्य सभा में बांग्लादेश की स्थिति पर बयान दिया और कहा कि हम वहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी पहली प्राथमिकता है। हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं और हम पूरी तरह सतर्क हैं।
जेलों से रिहाई शुरू
बांग्लादेश(Bangladesh) में अब कैसी राजनीति होगी इसके भी संकेत मिलने लगे हैं। कल राष्ट्रपति ने पूर्व प्रधान मंत्री खालिदा जिया को जेल से रिहा करने का आदेश दिया। जेल में बंद राजनीतिक लोग रिहा किए जा रहे हैं। एक हजार से अधिक लोग रिहा कर दिए गए हैं। अपना भविष्य देख कर अवामी लीग के लोग भूमिगत हो गए हैं। पूर्व सरकार के विदेशमंत्री हसन महमूद को हिरासत में ले लिया गया है। उन्हें ढाका हवाई अड्डे पर हिरासत मे लिया गया। अवामी लीग के एक नेता को जिंदा जला दिया गया। पुलिस ने हड़ताल करने की चेतावनी दी है। यह सब कोई अच्छी पिक्चर नहीं बनाते।
यूरोप से फंडिंग की खबर
वास्तव में बांग्लादेश(Bangladesh) में आरक्षण विरोधी आंदोलन तो एक बहाना था। कोर्ट के फैसले के बाद भी छात्र शांत नहीं हुए और वह शेख हसीना (Sheikh Hasina) से इस्तीफा मांगने लगे। उनके साथ कट्टरपंथी जमायते इस्लामी के लोग थे, जिन्हें शेख हसीना ने सत्ता से हटाया था और उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही थीं। जैसी सूचनाएं मिल रही हैं उनके खिलाफ इस आंदोलन को आईएसआई और कुछ विदेशी शक्तियां भी शह दे रहीं थीं। छात्रों को यूरोप से फंडिंग की भी खबर है। दरअसल शेख हसीना जिस तरह भारत के निकट थीं और उसके हिंतों पर नरम रहती थीं,वह कुछ देशों को रास नहीं आ रहा था। आइएसआइ(ISI) को बांग्लादेश(Bangladesh) का निर्माण अभी तक हजम नहीं हुआ। वह कट्टरपंथियों को तो उकसा ही रहा है।
अमेरिका का भी हाथ
ऐसा संकेत हैं कि अमेरिका भी बांग्लादेश(Bangladesh) को अस्थिर करना चाहता है। उसने शेख हसीना(Sheikh Hasina’s) का वीजा रद कर दिया है। पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश ने वस्त्र उद्योग में जो प्रगति की है,उसने अमेरिका के बाजार को भी प्रभावित किया है। अमेरिका म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को मिला कर पूर्वी तिमोर जैसा एक अलग देश बनाना चाहता था जिसका शेख हसीना ने विरोध किया। भला अमेरिका कैसे स्वीकार करता कि बांग्लादेश(Bangladesh) जैसा छोटा देश उनकी बात नहीं माने। आज की अस्थिरता को इस परिप्रेक्ष्य में भी देखा जाना चाहिए। अमेरिका वहां अपना प्रभाव चाहता है जिससे वह एशिया के इस हिस्से पर नियंत्रण कर सके। इसलिए उसने भी आग में घी डालने का काम किया।
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