यह पैरोल रोहतक के संभागीय आयुक्त संजीव वर्मा द्वारा मंजूर की गई, जिसे समाचार एजेंसी पीटीआई ने रिपोर्ट किया। राम रहीम,(Ram Rahim) जो दुष्कर्म के दोषी हैं, को चुनावों के समय पैरोल दिए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
5 अक्टूबर को हरियाणा में विधानसभा चुनाव (Haryana Vidhan Sabha election) होने हैं, ऐसे में राम रहीम को मिली पैरोल का समय खास मायने रखता है। हालांकि, चुनाव आयोग और राज्य सरकार ने इस पैरोल के साथ कई सख्त शर्तें लगाई हैं। इन शर्तों के तहत राम रहीम(Ram Rahim) को हरियाणा में प्रवेश करने की इजाजत नहीं होगी, साथ ही उन्हें किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा या राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा लेने की मनाही है।
हरियाणा(Haryana) के मुख्य चुनाव अधिकारी ने राज्य के जेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा था, जिसमें राम रहीम की पैरोल की अर्जी पर चर्चा की गई थी। इस पत्र में 30 सितंबर को मिले एक पिछले पत्र का जिक्र था, जिसमें राम रहीम ने पैरोल के लिए “आवश्यक और जरूरी कारण” बताए थे। चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह इन तथ्यों को ध्यान में रखकर पैरोल पर निर्णय ले।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि राम रहीम(Ram Rahim) की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए ताकि वह किसी भी चुनावी या राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल न हो सकें। यदि वह किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो उनकी पैरोल तुरंत रद्द कर दी जाएगी।
गुरमीत राम रहीम सिंह(Gurmeet Ram Rahim Singh) को इससे पहले भी पैरोल दी गई थी, लेकिन इस बार चुनाव के समय मिली पैरोल पर खास ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार और चुनाव आयोग यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनकी अस्थायी रिहाई से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।
कुल मिलाकर, राम रहीम को मिली इस पैरोल के साथ राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने उन पर सख्त निगरानी रखने और सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी बने रहें।
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