महात्मा सुशील ने कहा था ‘इस्सयोग’ न भूतो न भविष्यति आध्यात्मिक क्रांति : मां विजया

हवन-यज्ञ' एवं सदगुरुमाँ के आशीर्वचन के साथ महात्मा सुशील के दो दिवसीय महानिर्वाण महोत्सव का हुआ समापन, देश-विदेश के हज़ारों इस्सयोगियों ने पुष्पांजलि दी।

Written By : डेस्क | Updated on: April 24, 2025 11:22 pm

अत्यंत सूक्ष्म आध्यात्मिक साधना-पद्धति ‘इस्सयोग’ के प्रवर्त्तक महात्मा सुशील कुमार ने संसार को त्रितापों से मुक्ति और ब्रह्म-प्राप्ति का एक अत्यंत सरल मार्ग प्रदान किया। ‘इस्सयोग’ एक सामान्य गृहस्थ को भी आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान करने में समर्थ है। महात्मा जी इसीलिए इसे ‘न भूतो न भविष्यति आध्यात्मिक क्रांति’ कहा करते थे। इस्सयोग की साधना मन के विकारों को निकाल कर मन और आत्मा को शुद्ध करती है।

यह बातें गुरुवार को, ‘अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज’ के तत्त्वावधान में, ‘इस्सयोग’ के प्रवर्त्तक और अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के संस्थापक ब्रह्मलीन सद्ग़ुरुदेव महात्मा सुशील कुमार के 23वें महानिर्वाण महोत्सव के दूसरे दिन संस्था के दतियाना, बिहटा स्थित ‘इस्सयोग रिजुवेशन केंद्र’ में हवन-यज्ञ के पश्चात अपने आशीर्वचन में संस्था की अध्यक्ष और ब्रह्मनिष्ठ सदगुरुमाता माँ विजया जी ने कही। माता जी ने कहा कि तन का मैल, स्वेद, मल, मूत्र और स्वेद आदि के माध्यम से निकल जाता है, किंतु मन का मैल निकालने के लिए साधना का मार्ग अपनाना होगा। मन के द्वारा होने वाले पाप को साधना के द्वारा ही धोया जा सकता है। गंगा-स्नान से तो केवल तन के दोष मिटेंगे।

यह जानकारी देते हुए, संस्था के संयुक्त सचिव डा अनिल सुलभ ने बताया कि, हवन-यज्ञ में मुख्य यज्ञमान के रूप में संस्था के उपाध्यक्ष पूज्य बड़े भैया श्रीश्री संजय कुमार अपनी पत्नी रेणु गुप्ता के साथ प्रस्तुत हुए। छोटे भैया संदीप गुप्ता अपनी पत्नी नीना दूबे गुप्ता के साथ, संगीता झा, शिवम् झा, काव्या सिंह झा, दिव्या झा, ईं उमेश कुमार, लक्ष्मी प्रसाद साहू, माया साहू, वंदना वर्मा, अनंत कुमार साहू, श्रीप्रकाश सिंह, सरोज गुटगुटिया, दीनानाथ शास्त्री, किरण झा, हरवंश लाल आहूजा, डा जेठानंद सोलंकी, डा द्राशनिका पटेल, सूर्य भूषण, कपिलेश्वर मण्डल, सी एल प्रसाद, ब्रजेश शर्मा, संजय कुमार, सुशील प्रजापति, नीतिन साहू, राकेश श्रीवास्तव, डा मनोज धमीजा, अंजलि प्रसाद, मीरा देवी, किरण प्रसाद, अवधेश प्रसाद, प्रभात चंद्र झा, रविकान्त, अमित लालू, प्रशांत एस, डा कैलाश सोलंकी तथा राधा पटेल समेत इंग्लैंड, अमेरिका, सिंगापुर, थाईलैंड, नेपाल और भारत के विभिन्न राज्यों से आए हज़ारों इस्सयोगियों ने आहूति दी।

इसके पूर्व कंकड़बाग स्थित गुरुधाम में कल दूसरे पहर से आरंभ हुई अखण्ड-साधना और संकीर्तन के समापन के पश्चात आज प्रातः आरती कर अखण्ड-साधना की पूर्णाहुति हुई। दो पहर के महाप्रसाद के पश्चात संस्था की कार्यसमिति की बैठक हुई। पुनः पौने सात बजे से भजन-संकीर्तन, जगत कल्याण के लिए ‘ब्रह्माण्ड-साधना’, सर्वधर्म-प्रार्थना और बड़े भैया का उदबोधन हुआ। सुप्रसिद्ध गायन-कलाकार सत्यमजी आनन्द जी के भजन गायन के साथ दो दिवसीय यह उत्सव श्रद्धा-भक्ति के साथ संपन्न हुआ।

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