नेपाल में कुदरत का कहर : 389 मौतें, 1,400 से ज्यादा लापता; 288 भारतीयों से संपर्क टूटा

 नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड में मृतकों की संख्या 389 पहुंच गई है, जबकि नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 1,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इनमें 30 से अधिक देशों के सैकड़ों विदेशी नागरिक शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री, पर्यटक और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले भारतीय शामिल हैं।

बाढ़ से तबाही का मंजर
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: August 27, 2026 11:49 pm

पुलिस के अनुसार, नेपाल में कुदरत का कहर ऐसा बरपा कि गुरुवार रात तक आठ जिलों से 389 शव बरामद किए गए हैं और 466 घायलों को बचाया गया है। लेकिन कई इलाके सड़क और संचार संपर्क से कटे हैं। मलबे और क्षतिग्रस्त पुलों के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।

बाढ़ नहीं, हिमालयी तबाही की श्रृंखला

यह सामान्य मानसूनी बाढ़ नहीं थी। नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी नदी के ऊपरी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिरा, जिससे नदी का प्रवाह बाधित हुआ और पानी, बर्फ, पत्थर और मलबे का विशाल सैलाब नीचे की ओर आया। इससे भोटेकोशी के साथ त्रिशूली और आगे नारायणी नदी तंत्र में भी तबाही मची।

शुरुआत में भूकंपीय गतिविधि को संभावित वजह माना गया, लेकिन बाद की रिपोर्टों में ग्लेशियल कोलैप्स, आइस-रॉक एवेलांच और डेब्रिस फ्लो को आपदा का मुख्य कारण बताया गया। तेज रफ्तार मलबे ने कुछ ही समय में गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। करीब 40 किलोमीटर सड़कें, 35 मोटर योग्य और 45 झूला पुल क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।

33 देशों के 596 विदेशी नागरिक लापता

नेपाल के विदेश मंत्रालय के 27 अगस्त रात 8 बजे तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 33 देशों के 596 विदेशी नागरिक लापता हैं। इनमें सबसे ज्यादा 167 भारतीय, इसके बाद चीन के 100, अमेरिका के 66, यूक्रेन के 53 और मलेशिया के 51 नागरिक हैं। ऑस्ट्रेलिया के 35, ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 25 नागरिक भी लापता हैं।

इसके अलावा सिंगापुर के 9, जर्मनी के 8, रूस के 6, दक्षिण अफ्रीका के 6 और लातविया के 6 नागरिक लापता हैं। जापान और न्यूजीलैंड के 5-5, फ्रांस और दक्षिण कोरिया के 4-4, पुर्तगाल और स्पेन के 3-3 तथा बेल्जियम, आयरलैंड, कजाखस्तान और नीदरलैंड्स के 2-2 नागरिक भी अब तक नहीं मिले हैं। बेलारूस, फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, सर्बिया और स्वीडन का एक-एक नागरिक भी लापता है। नेपाल के मुताबिक 627 विदेशी नागरिक प्रभावित हुए थे, जिनमें 31 मिल चुके हैं और 596 की तलाश जारी है।

भारतीयों के मामले में आंकड़ों का दायरा अलग है। नेपाल की भोटेकोशी सूची में 167 भारतीय लापता हैं, जबकि भारत सरकार के व्यापक आकलन में 288 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है। भारत के अनुसार तिब्बत में करीब 200 भारतीयों ने सहायता मांगी है और त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 73 भारतीय भी संपर्क से बाहर हैं। तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों को बचाया जा चुका है।

कैलाश मानसरोवर मार्ग पर भी तबाही

भोटेकोशी क्षेत्र से तिब्बत जाने वाले रास्ते पर बड़ी संख्या में भारतीय और विदेशी तीर्थयात्री मौजूद थे। बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत संपर्क मार्ग को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। कई यात्री नेपाल में फंस गए, जबकि कुछ चीन के तिब्बत क्षेत्र में फंसे हैं।

तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी 558 लोगों के लापता होने की सूचना है। इस तरह नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों की कुल संख्या 1,400 से अधिक हो गई है।

हेलीकॉप्टरों से राहत, मलबे में जिंदगी की तलाश

नेपाल सेना, पुलिस और Armed Police Force के जवान हेलीकॉप्टरों से दुर्गम इलाकों में पहुंचकर लोगों को निकाल रहे हैं। ड्रोन और खोजी दलों की मदद से मलबे में फंसे लोगों तथा शवों की तलाश जारी है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों की तलाश और उनके परिवारों को जानकारी देने के लिए Emergency Response Team बनाई है।

भारत ने नेपाल को राहत सामग्री, दवाएं, खाद्य सामग्री और आपदा राहत उपकरण भेजे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात कर हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्थिति की समीक्षा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रभावित भारतीयों और उनके परिवारों के लिए 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष भी बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय मदद तेज

अमेरिका, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया ने आर्थिक एवं मानवीय सहायता की घोषणा की है। चीन तिब्बत में बचाव अभियान चला रहा है। संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रॉस, WHO, UNICEF, Oxfam और अन्य संस्थाएं राहत सामग्री और विशेषज्ञ सहायता जुटा रही हैं। UNICEF के मुताबिक 17,000 से ज्यादा बच्चे प्रभावित हुए हैं और हजारों परिवारों को भोजन, पानी, दवाओं और अस्थायी आश्रय की जरूरत है।

दूसरी बाढ़ का खतरा

सबसे बड़ी चिंता अब भी खत्म नहीं हुई है। हिमस्खलन और चट्टानों के मलबे से नदी के ऊपरी हिस्से में झीलनुमा जलाशय बन गया है। इसमें पानी बढ़ रहा है और प्राकृतिक बांध टूटने पर नीचे की ओर एक और विनाशकारी फ्लैश फ्लड आ सकती है। प्रशासन नदी घाटियों में निगरानी बढ़ाकर निचले इलाकों के लोगों को सतर्क कर रहा है।

नेपाल की यह आपदा अब केवल एक देश की त्रासदी नहीं रह गई है। सैकड़ों मौतें, 1,400 से ज्यादा लोग लापता, 33 देशों के नागरिकों का संकट और भारत के 288 नागरिकों से संपर्क टूटना इसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकट में बदल चुका है। बचाव दल मलबे में जिंदगी तलाश रहे हैं और परिवार अब भी अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।

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