संसार भर के नेत्रहीनों और बधिरों की महान प्रेरणा-स्रोत हैं लेखिका हेलेन केलर

संसार भर के नेत्रहीनों और बधिरों की महान प्रेरणा-स्रोत हेलेन ऐडम्स केलर कला में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाली संसार की पहली बधिर और नेत्रहीन महिला थी, जिन्होंने अपने आत्म-बल से विश्व्ख्याती अर्जित करने में सफल रहीं। वो एक महान लेखिका, सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक थीं।

Written By : डेस्क | Updated on: June 27, 2025 8:59 pm

ब्रेल लिपि के आविष्कारक लूइस ब्रेल के बाद जिस नेत्रहीन दिव्यांग को संसार श्रद्धा से देखता है,वह हेलेन केलर ही है। यह बातें शुक्रवार को, बिहार नेत्रहीन परिषद के तत्त्वावधान में, कदमकुआं स्थित बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए, साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही।

उन्होंने कहा कि, हेलेन केलर का जन्म आज ही के दिन 27 जून 1880 को अमेरिका के टस्कंबिया में हुआ था। जन्म के समय में वो पूरी तरह से स्वस्थ थीं। किंतु 19वें महीने में वो इस प्रकार अस्वस्थ हुईं कि उनकी बोलने और सुनने की ही नहीं देखने की क्षमता भी समाप्त हो गयी। किंतु उस बालिका ने हिम्मत नहीं हारी और मात्र 6 वर्ष की आयु से ही उसने कठिन ज्ञान-साधना आरंभ की और एक विदुषी लेखिका तथा समर्पिता समाज सेविका के रूप में विश्व-प्रसिद्ध हुईं।

उन्होंने छात्र-जीवन से ही लिखना आरंभ कर दिया था। युवावस्था में ही आयी उनकी पहली पुस्तक ‘द स्टोरी ऑफ माय लाइफ़’ ने ही धूम मचा दी। उन्होंने माहिलाओं के मताधिकार, श्रम-अधिकार और समानता के लिए संघर्ष किया और प्रेरणा दी। अपनी रहनाओं में वो कट्टरपंथ और युद्ध का विरोध करती हैं तथा शांति, सद्भाव और निष्ठापूर्ण श्रम पर बल देती हैं। उनकी रोमांचक और चमत्कारी जीवन-कथा ने संसार भर के विद्वानों और फ़िल्मकारों को भी आकर्षित किया। उनके जीवन पर अनेक फ़िल्में भी बनी। केलर को स्मरण करना, अपनी आंतरिक शक्तियों को प्रकाशित करने की तरह आवश्यक है।

समारोह के मुख्य अतिथि और पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि यह सभी कल्याणकारी सरकार का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि राज्य में कोई भी दुखी और अक्षम नही रहे। यह सरकार का काम है कि प्रत्येक विकलांग को सम्मान-पूर्वक जीवन-यापन की सभी सुविधा उपलब्ध कराए। सरकार जातीय जन-गणना करा रही है, किंतु दिव्यांग-जन की जन-गणना कब होगी? न्यायमूर्ति प्रसाद ने इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका ‘उमंग’ का भी लोकार्पण किया।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए, परिषद के संस्थापक महासचिव और सुख्यात नेत्रहीन-दिव्यांग डा नवल किशोर शर्मा ने हेलेन केलर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की तथा सरकार से मांग की कि बिहार में नेत्रहीनों की जन-गणना की जाए। पटना में लूई ब्रेल की मूर्ति लगायी जाए, ब्रेल-प्रेस और ब्रेल पुस्तकालय की स्थापना हो, नेत्रहीन विद्यालयों विशेष शिक्षकों और कर्मियों की अविलम्ब नियुक्ति की जाए तथा विकालांग-आयुक्त के पद पर इस क्षेत्र के अनुभवी विकलांग की नियुक्ति हो।

समारोह के विशिष्ट अतिथि डा दिवाकर तेजस्वी, परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रामलाल खेतान, पटना कालेज के पूर्व प्राचार्य रघुनंदन शर्मा, अशोक कुमार सिंह, रवीन्द्र कुमार सिंह, दिव्यांग मंच के सचिव सचिन कुमार, जूली कुमारी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

मंच का संचालन चर्चित दिव्यांग युवक और बिहार विकलांग अधिकार मंच के सचिव राकेश कुमार ने तथा धनयवाद-ज्ञापन रघुनाथ प्रसाद सिंह ने किया। इस अवसर पर समाजसेवी मधेश्वर शर्मा, सूरज कश्यप, कृष्ण कुमार, शिवानी कुमारी, विशाल अग्रवाल, संजीव दयाल आदि बड़ी संख्या में दिव्यांग एवं प्रबुद्धजन उपस्थित है।

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