पुरुष अभिनय वर्ग में इस बार पुरस्कार साझा किया गया। मलयालम फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’ में अभिनय के लिए ममूटी और ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। तमिल फिल्म ‘अमरन’ के निर्देशक राजकुमार पेरियासामी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सम्मान दिया गया।
पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर वाले अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिलना समारोह के प्रमुख आकर्षणों में रहा। कन्नड़ सिनेमा के साथ उन्होंने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा में दीर्घकालिक और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।
‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिलना भी समारोह का प्रमुख परिणाम रहा। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में यामी गौतम ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े घटनाक्रमों को कहानी का आधार बनाया गया है। यामी गौतम को इसी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया।
‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार उनके करियर के महत्वपूर्ण सम्मानों में शामिल हो गया। फिल्म में उन्होंने पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के जीवन से प्रेरित भूमिका निभाई थी। वहीं ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ में उनके अभिनय के लिए सम्मानित किया गया। दोनों को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया।
निर्देशन के क्षेत्र में ‘अमरन’ के लिए राजकुमार पेरियासामी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक चुना गया। वहीं ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए अभिनेता रणदीप हुड्डा को सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का पुरस्कार मिला। यह उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी।
व्यावसायिक रूप से चर्चित फिल्मों को भी राष्ट्रीय पुरस्कारों में जगह मिली। ‘कल्कि 2898 एडी’ को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म जो संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करती है की श्रेणी में सम्मान मिला। ‘पुष्पा: द रूल पार्ट-02’, ‘स्त्री 2’, ‘भूल भुलैया 3’ और ‘महाराजा’ जैसी फिल्मों को भी अलग-अलग रचनात्मक और तकनीकी श्रेणियों में पुरस्कार मिले।
हिंदी सिनेमा की श्रेणी में ‘श्रीकांत’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार दिया गया। ‘भक्षक’ के लिए संजय मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। ‘स्त्री 2’ को कोरियोग्राफी और ‘महाराजा’ को एक्शन निर्देशन के लिए पुरस्कार मिला। ‘भूल भुलैया 3’ को भी तकनीकी श्रेणी में सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में क्षेत्रीय भाषाओं और अलग-अलग क्षेत्रों के सिनेमा की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही। ‘फेमिनिची फातिमा’ को सर्वश्रेष्ठ मलयालम फिल्म चुना गया। नॉन-फीचर वर्ग में ‘भंगार’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म और ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार मिला। संथाली फिल्म ‘आंगेन’ के लिए रवि राज मुर्मू को नॉन-फीचर वर्ग में सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का सम्मान दिया गया।
नॉन-फीचर श्रेणी में आनंद एल. राय को ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी–एकता का प्रतीक’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला। इससे समारोह के आयोजन स्थल और पुरस्कारों के बीच भी एक विशेष जुड़ाव दिखाई दिया।
पहली बार गुजरात में भव्य आयोजन
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह की एक बड़ी विशेषता इसका आयोजन स्थल भी रहा। समारोह इस बार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बजाय गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया। यह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के आयोजन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से समारोह को देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाने की पहल पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सिनेमा की क्षेत्रीय विविधता और देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद फिल्म निर्माण की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच से जोड़ना बताया गया है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। इसके बाद से ये पुरस्कार भारतीय सिनेमा में रचनात्मक, तकनीकी और कलात्मक उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने का प्रमुख माध्यम बने हुए हैं। फीचर फिल्मों के अलावा नॉन-फीचर फिल्मों और सिनेमा पर लेखन की विभिन्न श्रेणियों में भी पुरस्कार दिए जाते हैं।
इस बार के समारोह में एक ओर अनंत नाग जैसे वरिष्ठ कलाकार को भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान के लिए सर्वोच्च फिल्म सम्मान मिला, वहीं ममूटी, कार्तिक आर्यन और यामी गौतम जैसे कलाकारों के साथ नई पीढ़ी के निर्देशकों और तकनीशियनों को भी राष्ट्रीय पहचान मिली। अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों की मौजूदगी ने समारोह को भारतीय सिनेमा की विविधता का व्यापक मंच बना दिया।
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