मगही साहित्यकारों का प्राणवंत दस्तावेज है ‘मगही के थाती’: डॉ अनिल सुलभ

डा ओम् प्रकाश जमुआर अपने पिता स्मृतिशेष साहित्यकार सुरेंद्र प्रसाद जमुआर की भाँति, बिहार के मगही साहित्यकारों के अवदानों और उनके कृतित्व को अमरता प्रदान कर रहे हैं। इनकी सद्यः प्रक्षित पुस्तक 'मगही के थाती', मगही के दिवंगत साहित्यकारों का प्राणवंत दस्तावेज है। इसमें ४९ साहित्यकारों की संक्षिप्त जीवनियाँ हैं, जिनमे उनके साहित्यिक अवदानों को रेखांकित किया गया है।

Written By : डेस्क | Updated on: September 18, 2025 11:33 pm

 

डा ओम् प्रकाश जमुआर की पुस्तक का हुआ लोकार्पण, आयोजित हुआ ‘लोक भाषा कवि-सम्मेलन’

पटना, १८ सितम्बर।

यह बातें गुरुवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह एवं लोक-भाषा कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि मगही-साहित्यकारों मगही भाषा में लिखी गयी यह पुस्तक न केवल सुधी पाठकों के लिए अपितु शोध के विद्यार्थियों के लिए भी बहुत उपयोगी है। इस पुस्तक के माध्यम से अनेक अलक्षित साहित्यकारों पर भी पर्याप्त प्रकाश पड़ा है।

समारोह का उद्घाटन करते हुए, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि अपने बड़ों का स्मरण करना, दिवंगत साहित्यकारों को थाती के रूप में सम्मान देना एक बड़ा काम है, जो डा ओम् प्रकाश जी ने बहुत ही श्रम पूर्वक किया है। लोकार्पित पुस्तक से साहित्य जगत में मगही के महान योगदान का पता चलता है।

समारोह के मुख्य अतिथि और राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग, बिहार के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा कि मगही के साहित्यकारों की स्मृति को नमन कारने वाली, डा जमुआर की यह पुस्तक अत्यंत उत्कृष्ट और लाभकारी है। इसमें अनेक साहित्यकारों को स्थान मिला है। डा जमुआर इसके लिए बधाई के पात्र हैं।

अतिविशिष्ट अतिथि और विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य डा उपेंद्र नाथ वर्मा ने लेखक को बधाई देते हुए कहा कि मगही के साहित्यकारों ने मगही के साथ हिन्दी की भी बड़ी सेवा की है। मगही बहुत समृद्ध भाषा है। इसे संविधान की अष्टम अनुसूची में स्थान अवश्य ही मिलना चाहिए।

सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष जियालाल आर्य, पत्रिका ‘मगही’ के संपादक धनंजय श्रोत्रिय, मगही पत्रिका ‘सारथी’ के संपादक जयनंदन सिंह, डा रत्नेश्वर सिंह, डा अशोक प्रियदर्शी तथा कुमार अनुपम आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर आयोजित लोक-भाषा कवि-सम्मेलन में, आशा रघुदेव, डा पुष्पा जमुआर, श्याम बिहार प्रभाकर, ईं अशोक कुमार, गोपाल सागर तथा अशोक कुमार सिंह ने ‘मगही’ में, डा रत्नेश्वर सिंह, डा प्रतिभा रानी, कमल किशोर वर्मा, डा मीना कुमारी परिहार, सूर्य प्रकाश उपाध्याय तथा नीता सहाय ने भोजपुरी में, डा विद्या चौधरी ने बज्जिका में तथा श्रीकांत व्यास ने अंगिका में अपनी मधुर रचनाओं का सस्वर पाठ किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद- ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

वरिष्ठ कथा-लेखिका विभारानी श्रीवास्तव, वरिष्ठ कवि मधुरेश नारायण, चंदा मिश्र, शायरा शमा कौसर ‘शमा’, कवि सिद्धेश्वर, बाँके बिहारी साव, मिथिलेश कुमार, इन्दु भूषण सहाय, वीणा सिन्हा, हरेश कुमार, उषा सिंह, कमला सिंह, कोमल बरनवाल, पवन कुमार सिन्हा, डा बिंदेश्वर प्रसाद गुप्ता, भास्कर त्रिपाठी, देवेंद्र कुमार, अभय सिन्हा, सतीश चन्द्र आज़ाद, उपेंद्र कुमार, प्रणय कुमार सिन्हा, डा पंकज कुमार आदि अनेक प्रबुद्धजनों की समारोह में उपस्थिति रही।

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