प्रो. मोहन खोखर जन्मशताब्दी वर्ष समारोह की मुख्य अतिथि थीं आईजीएनसीए की ट्रस्टी, पूर्व राज्यसभा सांसद, विश्वविख्यात नृत्यगुरु पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह। इस अवसर पर प्रख्यात विद्वान, लेखक, राजनेता, राजनयिक डॉ. कर्ण सिंह ने तृतीय प्रो. मोहन खोखर स्मारक व्याख्यान दिया। स्वागत भाषण आईजीएनसीए के संरक्षण एवं सांस्कृतिक अभिलेखागार के प्रमुख प्रो. अचल पांडेय ने दिया, जबकि बीज वक्तव्य आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने दिया। कार्यकम के क्यूरेटर और संपादक प्रो. आशीष खोखर ने समापन भाषण दिया। मंच पर भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद् (आईसीसीआर) की महानिदेशक के. नंदिनी सिंगला और नीमराणा समूह के अध्यक्ष अमन नाथ की भी गरिमामय उपस्थिति रही।
अपने व्याख्यान में डॉ. कर्ण सिंह ने प्रो. मोहन खोखर की उपलब्धियों पर बात करते हुए कहा कि एक आदमी (मोहन खोखर) ने जो कमाल किया है, वह वास्तव में चमत्कार है। अगर वो अपने कलेक्शन को विदेशों में दे देते, तो उन्हें लाखों डॉलर मिलते और वे आराम से रह सकते थे, लेकिन उन्होंने इस कलेक्शन को भारत से बाहर नहीं जाने दिया। डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि मोहन खोखर जो काम करके गए हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए थाती है। इसकी मदद से लोग भारतीय डांस पर काम कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी संस्कृति केवल भारत तक सीमित नहीं है, यह विश्वव्यापी है। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। डॉ. कर्ण सिंह ने अपने भाषण का समापन शिव स्तुति से किया।
मुख्य अतिथि डॉ. सोनल मानसिंह ने कहा कि यह अवसर केवल स्मरण का नहीं, बल्कि उत्सव का है। मोहन खोखर ने भारतीय नृत्य इतिहास को जिस सूक्ष्मता और समर्पण के साथ संजोया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है। उनका दृष्टिकोण केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं था, बल्कि एक स्थायी अभिलेख की स्थापना करना था, जहां नृत्य की आत्मा को महसूस किया जा सके। आईजीएनसीए के सहयोग से यह सपना अब वास्तविकता का रूप ले चुका है। ऐसे प्रयास न केवल कला को संरक्षित करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को उससे गहराई से जोड़ते भी हैं।
डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने मोहन खोखर डांस कलेक्शन के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह विश्व का सबसे बड़ा डांस कलेक्शन है और आईजीएनसीए की शान है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मोहन खोखर डांस कलेक्शन को यूनेस्को की हेरिटेज सूची में शामिल किया जाना चाहिए। स्वर्गीय मोहन खोखर के पुत्र, उत्तराधिकारी, मोहन खोखर डांस कलेक्शन के क्यूरेटर, प्रसिद्ध नृत्य इतिहासकार और डांस क्रिटिक प्रो. आशीष खोखर ने कहा कि यह शताब्दी वर्ष केवल उनके पिता को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि उस भारतीय नृत्य इतिहास का उत्सव है, जिसे उन्होंने पीढ़ियों के लिए बड़े परिश्रम से संजोया। उन्होंने कहा, “उनकी दृष्टि एक स्थायी अभिलेखागार बनाने की थी और आईजीएनसीए के सहयोग से वह स्वप्न साकार हो चुका है और उचित जगह पर पहुंच चुका है।”
कार्यक्रम का शुभारम्भ 25 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाटिका से हुआ, जिसमें पंडित हरीश गंगानी (बड़ौदा), भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी की प्रख्यात नृत्य गुरु ‘पद्म भूषण’ यामिनी कृष्णमूर्ति के शिष्य, इंडियन रिवाइवल ग्रूप के नर्तकों सहित कई नृत्य आचार्यों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद, प्रो. मोहन खोखर पर आधारित एक विशेष फिल्म ‘मि. डांस ऑफ इंडिया’ का प्रदर्शन भी किया गया, जिसका निर्माण जेमिनी रॉय परिवार और ‘फिल्म कारीगर’ द्वारा किया गया है।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियों में प्रसिद्ध नृत्यांगना शोवना नारायण, रंजना गौहर, माधवी मुद्गल, वनश्री राव, किरण सेगल, प्रतिभा प्रह्लाद, नलिनी-कमलिनी, गीता महालिक सहित देश-विदेश के कई ख्यातिलब्ध नृत्यांगनाएं और विद्वान शामिल हुए। कार्यक्रम और गरिमामय हो गया, जब जानी-मानी विभूतियों शेरोन लोवेन, पपीहा देसाई, राजेंद्र गंगानी, सायोनी चक्रबर्ती, अंबिका पणिकर, अरुषि मुद्गल, मालती श्याम, संगीता चटर्जी, विधा लाल, निशा महाजन, रानी खानम और रवि यादव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर प्रो. मोहन खोखर की प्रसिद्ध वार्षिक पत्रिका ‘अटेंडांस’ (AttenDance) के रजत जयंती विशेषांक ‘इंडियन डांस इन फ्रांस’ का लोकार्पण मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया और इसकी पहली कॉपी अमन नाथ को प्रदान की गई। इस अंक की अतिथि संपादक हैं मोंपेलिए, फ्रांस की सोन्या वाइनी सिंह। इस विशेषांक में 70 नृत्यांगनाओं और संस्थानों का विस्तृत विवरण संकलित है।
मुख्य समारोह में दिल्ली के 100 नर्तक और नर्तकियों की विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन कार्यक्रमों के साथ ही, ‘द ए टू ज़ेड ऑफ इंडियन डांस- विग्नेट्स ऑफ वेटरन्स’ (The A–Z of Indian Dance – Vignettes of Veterans) नामक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी हुआ। इस पूरे आयोजन ने न केवल प्रो. मोहन खोखर के अविस्मरणीय योगदान को श्रद्धांजलि दी, बल्कि भारतीय नृत्य विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में आईजीएनसीए की निरंतर प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
प्रो. मोहन खोखर के बारे में
30 दिसंबर 1924 को अविभाजित भारत के पंजाब में जन्मे प्रो. मोहन खोखर ने ज़ोहरा सहगल से प्रशिक्षण लिया और फिर 1945 में ‘कलाक्षेत्र’ के पहले पुरुष छात्र बने, जहां उन्होंने रुक्मिणी देवी अरुंडेल और पेरिया सारदा से शिक्षा ली। 1949 में उन्होंने भरतनाट्यम की प्रसिद्ध नृत्यांगना और गुरु एम.के. सरोजा से विवाह किया। उनकी विशाल विरासत में मोहन खोखर डांस कलेक्शन (एमकेडीसी) शामिल है, जो अब आईजीएनसीए में स्थित है और डॉ. सच्चिदानंद जोशी के नेतृत्व में संरक्षण और सांस्कृतिक अभिलेखागार प्रभाग के प्रमुख अचल पंड्या और उनकी टीम द्वारा संरक्षित है। एमकेडीसी गैलरी आज आईजीएनसीए के मुख्य द्वार पर एक गौरवशाली स्थान पर स्थित है, जो राष्ट्रीय महत्व का एक सांस्कृतिक संग्रह है। यह 18 सितंबर से 30 दिसंबर 2025 (वर्ष के अंत) तक खुला रहेगा। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पहला नृत्य संग्रहालय और अभिलेखागार है।
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