जबतक पिता अथवा पति पर निर्भरता रहेगी स्त्रियाँ सशक्त नहीं कही जा सकतीं : हरजोत कौर

आज की बालिकाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह पुरुषों से समानता चाहती हैं या विशेष सहायता? दोनों एक साथ नहीं हो सकती। जबतक स्त्रियाँ अपने पिता अथवा पति पर निर्भर रहेंगी, तबतक वो सशक्त नहीं हो सकती और न सशक्त कही जा सकेंगी। इसलिए आवश्यक है कि बालिकाएँ स्वयं को पूर्ण आत्म-निर्भरता के लिए तैयार करें।

Written By : डेस्क | Updated on: April 11, 2026 11:43 pm

यह बातें शनिवार को बिहार इण्डस्ट्रीज एशोसिएशन सभागार में लोक-कल्याणकारी संस्था ‘अभिलाषा ज्योति फ़ाउंडेशन’ के तत्त्वावधान में आयोजित ‘बालिका सशक्तिकरण” को समर्पित वार्षिकोत्सव एवं सम्मान-समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करती हुईं राजस्व परिषद बिहार की अध्यक्ष एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी हरजोत कौर ने कही। उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित बालिकाओं को प्रोत्साहित किया तथा उन्हें एक गुण-संपन्न नागरिक बनने की सलाह दी।

इसके पूर्व समारोह का उद्घाटन करते हुए बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि अभिलाषा ज्योति फ़ाउंडेशन जैसी संस्थाओं की भूमिका उपेक्षित समुदाय के सामाजिक उत्थान में सराहनीय मानी जाती है। बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्य करने वाली संस्थाएँ प्रशंसा की पात्र हैं। राज्य सरकार भी उपेक्षितों के सर्वांगीण विकास हेतु प्रतिबद्ध है।

समारोह के विशिष्ट अतिथि और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि हमारा भारतीय ज्ञान सदैव नारी-शिक्षा पर बल देता आया है। यह माना जाता है कि यदि एक बालक शिक्षित होता है तो एक व्यक्ति शिक्षित हुआ, किंतु यदि एक बालिका शिक्षित होती है तो एक पूरा परिवार शिक्षित होता है। इसलिए कि एक माता अपनी संतति की प्रथम शिक्षिका होती है। माता के गुणों और ज्ञान का सर्वाधिक प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है। माता गुणी-ज्ञानी होगी तो उसकी संतति भी वैसी ही होगी। उन्होंने कहा कि धन के पीछे भगाने वाले लोगों को तैयार करने वाली शिक्षा के स्थान पर चरित्रवान-गुणवान बनाने वाली शिक्षा की ओर बालिकाएँ आगे बढ़ें।

इस अवसर पर अतिथियों ने संस्था की कोषाध्यक्ष और विदुषी कवयित्री मीरा श्रीवास्तव की बाल-कविताओं के संग्रह ‘चिन-चिन चिड़ियाँ’ का भी लोकार्पण किया। उद्घाटन-सत्र को बी आइ ए के अध्यक्ष रामलाल खेतान, पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार अग्रवाल, संस्था की अध्यक्ष ज्योति श्रीवास्तव, आशा अग्रवाल तथा मीरा श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया। मंच का संचालन शिवानी गौड़ ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन संस्था के सचिव और बिहार प्रशासनिक सेवा के अवकाश प्राप्त अधिकारी आनन्द बिहारी प्रसाद ने किया। बिहार के मुख्य सूचना आयुक्त त्रिपुरारी शरण, कवयित्री डा पूनम आनन्द तथा डा मीना कुमारी परिहार की विशेष उपस्थिति रही।

उद्घाटन के पश्चात तीन सत्रों के आयोजन हुए। प्रथम सत्र में अभिवंचित वर्ग की संस्था ‘नारी-गुंजन’, ‘रेनबो होम्स’ तथा मूक-बधिर बालिकाओं के विशेष विद्यालय ‘आशादीप’ की बालिकाओं ने नृत्य, गीत एवं लघु-नाटिका का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दर्शकों को भाव-विह्वल कर दिया। दूसरे सत्र में ‘बालिका-विमर्श’ हुआ, जिसमें पटना विमेन्स कालेज की छात्राएँ उज्जैनी और तृषा तथा बाँकीपुर कन्या विद्यालय की छात्रा अपेक्षा ने अपने मन की बातें रखी। महिलाओं और बालिकाओं के बीच एक सार्थक संवाद भी हुआ, जिसमें आज की माताएँ, जो कल बालिका थीं विभारानी श्रीवास्तव, डा अनीता राकेश तथा जयंती झा और बालिकाओं की ओर से आकांक्षा, कृतिका और शरिया ने जो कल की माता होंगी अपनी बातें रखीं।

तृतीय सत्र ‘विविधा’ में पटना महिला महाविद्यालय, आई टी आई, दीघा, उल्लास फ़ाउंडेशन, ट्री हाउस, मदर इंडिया एकेडमी, बाँकीपुर बालिका विद्यालय, गेलेक्सी इंटरनेशनल आदि विद्यालयों-महाविद्यालयों की छात्राओं ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अपने कौशल का परिचय दिया। छात्राओं की पेंटिंग्स की भी प्रदर्शनी लगायी गयी थी। विविध क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धि के लिए प्रांजलि राज, ज्ञानवी, दिशा तथा निहारिका को सम्मानित किया गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी लोकेश कुमार सिंह तथा रचना पाटिल ने सभी प्रतिभागी १५० छात्राओं को भी पुरस्कृत किया।

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