इंग्लैंड की जीत के नायक जोस बटलर और कप्तान हैरी ब्रूक रहे। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए मेजबान टीम ने तीन विकेट पर 257 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। बटलर ने केवल 64 गेंदों पर 131 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें कई दर्शनीय चौके और छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर कप्तान ब्रूक ने 45 गेंदों पर नाबाद 95 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 103 गेंदों में 233 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह बेअसर कर दिया। यह साझेदारी इंग्लैंड की T20 क्रिकेट की सबसे बड़ी साझेदारियों में शामिल हो गई।
257 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत एक बार फिर निराशाजनक रही। पूरी श्रृंखला में जिस ओपनिंग जोड़ी के प्रदर्शन पर सवाल उठते रहे, वह निर्णायक मुकाबले में भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से भारत लगातार दबाव में आ गया और आवश्यक रन गति लगातार बढ़ती चली गई। मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने संघर्ष का प्रयास जरूर किया, लेकिन लक्ष्य इतना बड़ा था कि भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवर में आठ विकेट पर 201 रन ही बना सकी। इंग्लैंड ने मुकाबला 56 रन से अपने नाम कर लिया।
भारतीय टीम चयन भी चर्चा का विषय बना रहा। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अंतिम एकादश में जगह नहीं दी गई। पूरी श्रृंखला में शीर्ष क्रम की अस्थिरता के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिलने पर क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच सवाल उठे। सोशल मीडिया पर भी चयन नीति को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिली।
पूरी श्रृंखला में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी ओपनिंग बल्लेबाजी और गेंदबाजी रही। नई गेंद से न तो बल्लेबाज मजबूत शुरुआत दिला सके और न ही गेंदबाज इंग्लैंड के आक्रामक बल्लेबाजों पर शुरुआती दबाव बना पाए। डेथ ओवरों में भी भारतीय गेंदबाज लगातार महंगे साबित हुए, जबकि फील्डिंग में भी कई महत्वपूर्ण अवसर गंवाए गए। इसके विपरीत इंग्लैंड ने हर विभाग में संतुलित और आक्रामक प्रदर्शन किया।
इस श्रृंखला की हार भारतीय टीम के लिए कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। लगातार चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले हारने का अवांछित रिकॉर्ड बताता है कि विश्व क्रिकेट में मजबूत मानी जाने वाली भारतीय टीम को अपने संयोजन, बल्लेबाजी क्रम और गेंदबाजी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा। अब दोनों टीमों के बीच होने वाली एकदिवसीय श्रृंखला में भारतीय टीम के सामने वापसी की चुनौती होगी, जबकि इंग्लैंड इस ऐतिहासिक जीत से मिले आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेगा।
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