अमित कुमार बीते 8-10 वर्षों से भूरी (49) के साथ दौलतनगर स्थित एक किराये के मकान में रह रहा था। मृतक के भाई राजकुमार ने पुलिस में दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि भूरी उम्र में काफी बड़ी होने के बावजूद पिछले कुछ महीनों से अमित को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। परिजनों का कहना है कि भूरी का मकसद अमित और उसके परिवार की ज़मीन और संपत्ति हड़पना था, जिसके लिए वह स्थानीय अपराधियों की मदद ले रही थी।परिजनों के मुताबिक उनके पास गाजियाबाद के दौलतनगर इलाके में ही दो जगह ज़मीन है। और अमित की मां के जेवरों पर भी आरोपी भूरी की नज़र थी।
राजकुमार ने बताया कि 12 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे वह अपने भाई अमित के साथ ट्रोनिका सिटी थाने पहुंचे थे ताकि भूरी और उसके साथियों द्वारा की गई मारपीट की शिकायत दर्ज करा सकें। अमित के दाहिने हाथ में गंभीर चोट थी, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत लेने से इनकार कर दिया। “हम थाने से मायूस होकर लौट आए। अगर पुलिस ने उस वक़्त हमारी बात सुन ली होती, तो आज मेरा भाई ज़िंदा होता,” राजकुमार ने कहा।
अमित के वकील सौरभ जैंथ ने बताया कि पुलिस ने स्पष्ट रूप से लापरवाही बरती है। उन्होंने कहा, “मेरे मुवक्किल अमित कुमार ने हत्या से पहले पुलिस से मदद मांगी थी, लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। अगर अब भी न्याय नहीं मिला, तो हम ज़िला अदालत का दरवाज़ा खटखटाएँगे।”
वहीं, आरोपी भूरी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि अमित कुमार नशे में था, उसने हंगामा किया और बाद में खुद फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पड़ोसियोंं ने बातचीत के दौरान इस संवाददाता को बताया कि इन दोनों के बीच झगड़ा होना आम बात थी। रात को तेज़ आवाज़ें सुनी गईं और सुबह जब दरवाज़ा खुलवाया गया, तो अमित पंखे से लटका मिला।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला दबने (asphyxia) से मौत की पुष्टि हुई है, साथ ही शरीर पर कई खरोंचें (abrasions) भी पाई गई हैं।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है कि जल्द ही इस रहस्यमयी मौत के और राज़ सामने आएंगे।
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