सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने वैश्विक स्तर पर करीबी 30 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है, जिनमें बड़ी संख्या भारत के टेक हब बेंगलुरू और हैदराबाद से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि कई कर्मचारियों को अचानक ईमेल के जरिए नौकरी खत्म होने की सूचना दी गई, जिससे आईटी प्रोफेशनल्स के बीच अनिश्चितता और चिंता बढ़ गई है।
भारत में ओरेकल के बड़े डेवलपमेंट और सपोर्ट ऑपरेशंस होने के कारण इस छंटनी का असर अपेक्षाकृत ज्यादा देखा जा रहा है। खासकर मिड-लेवल और सपोर्ट से जुड़े कर्मचारियों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अब तेजी से एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर शिफ्ट हो रही हैं, जिससे पारंपरिक आईटी नौकरियों की जरूरत कम हो रही है। कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने की रणनीति अपनाई जा रही है, जिससे लागत में कटौती और उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान के बीच संभावित टकराव, से आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे माहौल में कंपनियां जोखिम कम करने और खर्च नियंत्रित करने के लिए बड़े फैसले ले रही हैं, जिसका सीधा असर रोजगार पर पड़ रहा है।
आईटी सेक्टर में हाल के महीनों में भर्ती की रफ्तार पहले ही धीमी पड़ी थी, और अब इस तरह की छंटनी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बेंगलुरू और हैदराबाद जैसे शहरों में इसका असर रियल एस्टेट, स्टार्टअप इकोसिस्टम और उपभोक्ता खर्च पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आईटी सेक्टर में बदलते संकेत और बढ़ती चुनौतियां
आईटी सेक्टर में मौजूदा घटनाक्रम कई बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रहा है। सबसे प्रमुख संकेत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल का है, जिसके चलते पारंपरिक आईटी और सपोर्ट जॉब्स पर दबाव बढ़ रहा है। कंपनियां अब कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने के मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जिससे मिड और एंट्री लेवल नौकरियों की मांग घट रही है।
दूसरा बड़ा संकेत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से जुड़ा है। अमेरिका-ईरान जैसे भू-राजनीतिक तनावों के चलते कंपनियां अपने खर्च पर नियंत्रण कर रही हैं और जोखिम कम करने के लिए छंटनी जैसे कदम उठा रही हैं। इसका असर सीधे तौर पर भारत जैसे देशों पर पड़ता है, जहां बड़ी संख्या में ग्लोबल आईटी कंपनियों के ऑपरेशंस चलते हैं।
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