शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और सहयोगी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर मौजूद 98 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता माखनलाल सरकार के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री के इस कदम ने पूरे समारोह को अचानक भावनात्मक रंग दे दिया। मंच पर मौजूद नेताओं और हजारों समर्थकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से इस दृश्य का स्वागत किया। भाजपा ने इसे “कार्यकर्ता सम्मान और भारतीय राजनीतिक संस्कार” का प्रतीक बताया, जबकि कई जनता ने इसे समारोह का सबसे चर्चित और मानवीय क्षण माना।
करीब दो दशक तक तृणमूल कांग्रेस के वर्चस्व वाले बंगाल में भाजपा की यह जीत राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 सदस्यीय सदन में 206 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया और ममता बनर्जी के लंबे शासन का अंत कर दिया। इस बदलाव को “बंगाल की राजनीति का टर्निंग पॉइंट” बताया जा रहा है।
पूरे ब्रिगेड ग्राउंड को भगवा और राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से सजाया गया था। समारोह स्थल के बाहर सुबह से ही भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। भाजपा समर्थकों में भारी उत्साह दिखाई दिया और “जय श्रीराम” तथा “भारत माता की जय” के नारों से पूरा इलाका गूंजता रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने बंगाल में संगठन, हिंदुत्व, महिला वोट और ग्रामीण असंतोष को जोड़कर यह जीत हासिल की है। वहीं विपक्ष ने चुनाव परिणामों और नई सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस घटनाक्रम को व्यापक कवरेज दी। कई अखबारों और चैनलों ने इसे प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक रणनीति की बड़ी सफलता बताया, जबकि कुछ विदेशी मीडिया संस्थानों ने इसे भाजपा के राष्ट्रीय विस्तार और पूर्वी भारत में बढ़ती पकड़ के रूप में देखा। ब्रिगेड ग्राउंड में हुए इस शपथ ग्रहण समारोह ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
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