पश्चिम बंगाल में ‘ममता’ का किला ढहा, भाजपा प्रचंड जीत के साथ पहली बार सत्ता में

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को ऐतिहासिक उलटफेर दर्ज हुआ, जब 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य की सत्ता पर कब्जा जमा लिया। 293 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुई मतगणना में चुनाव आयोग के ताजा रुझानों और घोषित परिणामों के मुताबिक भाजपा ने स्पष्ट बहुमत के आंकड़े काफी पीछे छोड़ते हुए 206 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि तृणमूल कांग्रेस का आंकड़ा 81 पर सिमट गया। कांग्रेस पार्टी को दो, एजेयूपी को दो सीपीएम को एक और एआईएसएफ को एक सीट पर संतोष करना पड़ा।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: May 4, 2026 11:45 pm

सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई मतगणना के शुरुआती रुझानों से ही तस्वीर साफ होने लगी थी। पहले दौर की गिनती में बढ़त बनाने के बाद भाजपा ने पूरे दिन अपनी बढ़त कायम रखी और दोपहर बाद तक यह बढ़त निर्णायक बढ़त में बदल गई। देर शाम तक अधिकांश सीटों पर परिणाम घोषित होते-होते यह साफ हो गया कि पश्चिम बंगाल की सत्ता अब ‘दीदी’ के हाथों से निकल चुकी है।

चुनाव परिणामों में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तृणमूल कांग्रेस के जनाधार में आई बड़ी गिरावट के रूप में सामने आया है। 2021 के चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली पार्टी इस बार शहरी ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी पिछड़ती दिखी। कई मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को हार का सामना करना पड़ा, जबकि पार्टी का परंपरागत वोट बैंक भी खिसकता नजर आया।

इसके उलट भाजपा ने राज्य के लगभग सभी क्षेत्रों—जंगलमहल, दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल—में व्यापक बढ़त दर्ज कर अपनी चुनावी रणनीति की सफलता साबित की। कई सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों ने भारी अंतर से जीत हासिल की, जिससे यह संकेत मिला कि यह केवल सत्ता विरोधी लहर नहीं, बल्कि मतदाताओं के रुझान में व्यापक बदलाव का परिणाम है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस जनादेश के पीछे कई अहम कारण रहे। बंगाल में  15 वर्षों की सत्ता के बाद उभरी एंटी-इनकंबेंसी, भाजपा का मजबूत संगठन और बूथ स्तर तक की पकड़, तथा नेतृत्व के स्तर पर सीधी और आक्रामक लड़ाई ने चुनाव को एकतरफा बना दिया।

इस चुनाव के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी दूरगामी माने जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में लंबे समय से अपनी जमीन तलाश रही भाजपा के लिए यह जीत न केवल भौगोलिक विस्तार का संकेत है, बल्कि आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले उसकी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करने वाली भी है।  पश्चिम बंगाल का यह जनादेश केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है, जहां अब ‘पूर्ण सत्ता परिवर्तन’ का अध्याय लिखा गया है।

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